अहमदाबाद की एक राइस मिल कंपनी के अकाउंटेंट के फोन को हैक कर एक साइबर अपराधी ने मालिक का नंबर बदल दिया और फर्जी निर्देश देकर 80 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

  • साइबर अपराधी ने मैलिशियस फाइल के जरिए अकाउंटेंट का फोन हैक किया।
  • हैकर्स ने कॉन्टैक्ट लिस्ट में बॉस के असली नंबर को अपने नंबर से बदल दिया।
  • कंपनी को कुल 80 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।

गुजरात के अहमदाबाद में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक राइस मिल चलाने वाली कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा। एक शातिर हैकर ने तकनीकी चालाकी का उपयोग करते हुए कंपनी के अकाउंटेंट के मोबाइल फोन का एक्सेस प्राप्त किया और मालिक के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 80 लाख रुपये की ठगी कर ली।

पुलिस शिकायत के अनुसार, यह पूरी साजिश तब शुरू हुई जब कंपनी के अकाउंटेंट, जयेशभाई, के फोन पर एक संदिग्ध 'मैलिशियस फाइल' भेजी गई। जैसे ही जयेशभाई ने उस फाइल को खोला, हैकर ने उनके फोन का अनधिकृत एक्सेस प्राप्त कर लिया। इसके बाद, अपराधी ने बड़ी चतुराई से फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में जाकर कंपनी के मालिक, प्रदीपभाई के असली नंबर को हटाकर अपना नंबर सेव कर दिया और प्रोफाइल पिक्चर भी वही लगा दी।

जब अकाउंटेंट को व्हाट्सएप पर मैसेज मिला, तो उन्हें लगा कि वह उनके बॉस प्रदीपभाई ही हैं। फर्जी संदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से 80 लाख रुपये एक विशिष्ट बैंक खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया। बिना किसी संदेह के, अकाउंटेंट ने राशि ट्रांसफर कर दी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not a simple phishing attack but a sophisticated 'Contact Manipulation' strategy. In traditional scams, hackers create fake profiles, but here, they altered the victim's own trusted contact list, eliminating the primary layer of doubt. This highlights a critical vulnerability in mobile OS security and the lack of two-factor verification for high-value corporate transfers.

"जब विश्वास का स्रोत (Trusted Source) ही दूषित हो जाए, तो सबसे सतर्क व्यक्ति भी गलती कर सकता है; यही इस 'बॉस स्कैम' की सबसे खतरनाक बात है।"

इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब अपराधी ने अकाउंटेंट से 30 लाख रुपये की एक और मांग की। इस बार जयेशभाई को संदेह हुआ और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रदीपभाई से मुलाकात की, जिसके बाद इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

यह मामला 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) की श्रेणी में आता है, जहाँ अपराधी वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धरकर कर्मचारियों को गुमराह करते हैं। अहमदाबाद पुलिस का साइबर क्राइम विभाग अब आईपी एड्रेस और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपी की तलाश कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: 'मैलिशियस फाइल' या ट्रोजन हॉर्स ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो सामान्य दिखते हैं लेकिन बैकग्राउंड में आपके फोन का पूरा कंट्रोल हैकर को दे देते हैं।

Frequently Asked Questions

1. बॉस स्कैम (Boss Scam) क्या है?
यह एक प्रकार का सोशल इंजीनियरिंग हमला है जिसमें अपराधी कंपनी के उच्च अधिकारियों का रूप धरकर कर्मचारियों से गोपनीय जानकारी या पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

2. ऐसे हमलों से कैसे बचें?
किसी भी अज्ञात फाइल को डाउनलोड न करें और बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले हमेशा फोन कॉल या आमने-सामने बात करके पुष्टि करें।