ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली ने 35 विशेष विमानों के संचालन हेतु एक जटिल और सुरक्षित व्यवस्था की है। इसमें नियमित उड़ानों को प्रभावित किए बिना VVIPs के लिए अलग गलियारे और कई हवाई अड्डों का उपयोग किया जा रहा है।
- 35 विशेष विमानों के लिए इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और पालम तकनीकी क्षेत्र का उपयोग।
- दिल्ली के 300 किमी दायरे में गैर-अनुसूचित उड़ानों और ड्रोन पर सख्त प्रतिबंध।
- VVIP सुरक्षा के लिए कई निकास द्वारों और गुप्त रूटों की योजना।
- नियमित वाणिज्यिक उड़ानों के समय में 10-15 मिनट का समायोजन।
भारत की राजधानी दिल्ली इस समय एक विशाल कूटनीतिक और सुरक्षा अभ्यास का केंद्र बनी हुई है। ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के अवसर पर दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के आगमन के साथ, दिल्ली के हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों को एक किले में तब्दील कर दिया गया है। लगभग 35 विशेष विमानों के प्रबंधन के लिए भारतीय वायु सेना, CISF और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के बीच एक अभूतपूर्व समन्वय देखा जा रहा है।
VVIP गतिविधियों को सामान्य यात्री यातायात से पूरी तरह अलग रखा गया है। जहाँ आम यात्री मुख्य टर्मिनल का उपयोग करते हैं, वहीं सर्वोच्च स्तर के राष्ट्राध्यक्षों को पालम तकनीकी क्षेत्र के माध्यम से हैंडल किया जा रहा है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विदेशी नेताओं का आगमन और प्रस्थान पूरी तरह सुरक्षित हो और उन्हें सीधे सुरक्षित ग्राउंड अरेंजमेंट में ले जाया जा सके।
सुरक्षा की बहुस्तरीय रणनीति
सुरक्षा एजेंसियों ने VVIP काफिले के रूट को अप्रत्याशित बनाए रखने के लिए विशेष योजना बनाई है। CISF के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अंतिम समय तक यह तय नहीं किया जाता कि किस निकास द्वार का उपयोग किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके। इसके अलावा, विमानों को दिए जाने वाले विमानन ईंधन के नमूनों की भी कड़ी जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना को खत्म किया जा सके।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह ऑपरेशन केवल सुरक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की लॉजिस्टिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल का प्रदर्शन है। जब एक ही समय में दर्जनों राष्ट्राध्यक्ष एक शहर में होते हैं, तो हवाई क्षेत्र का प्रबंधन करना एक गणितीय चुनौती बन जाता है। यह दिखाता है कि भारत उच्च-दांव वाली अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को संभालने में कितना सक्षम है।
"हवाई क्षेत्र का यह सूक्ष्म प्रबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच एक सटीक संतुलन है।"
हवाई क्षेत्र के प्रबंधन की बात करें तो, DGCA ने 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली के 300 किमी के दायरे में गैर-अनुसूचित उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। निजी हल्के विमानों और ड्रोन (UAVs) की गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। वाणिज्यिक उड़ानों को भी VVIP मूवमेंट के अनुसार 10-15 मिनट आगे या पीछे खिसकाया गया है ताकि हवा में कोई टकराव न हो।
विमानों की पार्किंग एक और बड़ी चुनौती थी। इसके लिए केवल IGI हवाई अड्डे का ही नहीं, बल्कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सफदरजंग एयरपोर्ट और हिंडन एयरपोर्ट का भी उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न देशों के विमानों के अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर पार्किंग स्लॉट आवंटित किए गए हैं।
प्रश्न 1: क्या ब्रिक्स सम्मेलन के कारण सामान्य उड़ानों में देरी हो रही है?
उत्तर: अधिकांश उड़ानें समय पर हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से कुछ उड़ानों के समय में 10-15 मिनट का मामूली बदलाव किया गया है।
प्रश्न 2: VVIPs के लिए पालम तकनीकी क्षेत्र का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: यह मुख्य यात्री टर्मिनल से अलग है, जिससे उच्च स्तर की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित होती है।