कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से वैश्विक दक्षिण (Global South) में विश्वास बहाल करने और ईरान जैसे ब्रिक्स देशों के प्रति अधिक संवेदनशील रुख अपनाने की मांग की है। पार्टी ने रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षवाद के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया है।

  • कांग्रेस ने भारत के ऐतिहासिक राजनयिक कद को बहाल करने की मांग की है।
  • ईरान पर हमलों के प्रति कथित समर्थन और पश्चिम एशिया युद्ध में सीमित भूमिका पर सवाल उठाए गए।
  • ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने और UNSC स्थायी सदस्यता के लिए ठोस प्रयासों की आवश्यकता।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के अवसर पर, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की तीखी समीक्षा की है। कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने एक विस्तृत बयान जारी कर कहा कि भारत को वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच अपना खोया हुआ विश्वास पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता है।

कांग्रेस का तर्क है कि हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बताया है, लेकिन धरातल पर ठोस कार्रवाइयों की कमी रही है। पार्टी ने विशेष रूप से ब्रिक्स सदस्य ईरान पर हुए हमलों के प्रति भारत के कथित रुख और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट में भारत की सीमित राजनयिक भूमिका पर चिंता व्यक्त की है। खुर्शीद के अनुसार, भारत को यह साबित करना होगा कि वह संकट के समय में भी एक विश्वसनीय और रचनात्मक भागीदार बना हुआ है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है। भारत वर्तमान में एक ऐसे मोड़ पर है जहां उसे अमेरिका और रूस-चीन गुट के बीच संतुलन बनाना है। कांग्रेस का यह हमला इस बात की ओर इशारा करता है कि यदि भारत ब्रिक्स के भीतर एकजुटता नहीं बना पाता, तो उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

"रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ अलगाव नहीं, बल्कि सिद्धांतों के साथ बहुपक्षीय संबंधों को मजबूती देना है।"

आर्थिक मोर्चे पर, कांग्रेस ने ब्रिक्स देशों के साथ भारत के व्यापार संबंधों में गहरे असंतुलन की ओर ध्यान आकर्षित किया। खुर्शीद ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक व्यापार का लगभग 19.6% हिस्सा संभालते हैं, फिर भी भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच अभी भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने BRICS Pay System की सराहना की लेकिन गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की मांग की।

इसके अलावा, कांग्रेस ने 2014 में स्थापित कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) को पूरी तरह संचालित करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए ब्रिक्स देशों से ठोस समर्थन हासिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। पार्टी ने मांग की है कि प्रधानमंत्री मोदी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को शिखर सम्मेलन के परिणामों से अवगत कराना चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) की स्थापना 2006 में हुई थी और इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, जो अब नए सदस्यों के साथ और अधिक विस्तारित हो चुका है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कांग्रेस ने ईरान के मुद्दे पर सरकार से क्या कहा?
उत्तर: कांग्रेस ने कहा कि भारत को उन चिंताओं को दूर करना चाहिए जिनमें यह प्रतीत होता है कि भारत ने ब्रिक्स सदस्य ईरान पर हमलों का समर्थन किया है।

प्रश्न 2: व्यापार के संबंध में कांग्रेस की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: कांग्रेस चाहती है कि भारत ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार असंतुलन को कम करे और भारतीय उद्यमों के लिए निष्पक्ष बाजार शर्तें सुनिश्चित करे।