गुंटूर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से 40 साल पुराने भूमि अधिग्रहण विवादों को सुलझा लिया गया है। किसानों को उनके अधिग्रहित भूमि के लिए संशोधित मुआवजा प्रदान किया गया है।

  • 40 साल पुराने 24 भूमि अधिग्रहण अपीलों का राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटारा हुआ।
  • 1983 में बिजली सब-स्टेशन के लिए अधिग्रहित 58.97 एकड़ भूमि के लिए ₹23,000 प्रति एकड़ मुआवजा तय किया गया।
  • गुंटूर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने विभिन्न मामलों में करोड़ों रुपये के मुआवजे का वितरण किया।

गुंटूर, आंध्र प्रदेश: गुंटूर जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए चार दशक पुराने भूमि अधिग्रहण विवादों को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। यह मामला 1983 में कोट्टपल्ली गांव (मचर्ला मंडल, पलनाडू जिला) में एक 400/220 kV सब-स्टेशन के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि से संबंधित है।

इस समाधान के तहत, गुरुजाला अदालत में लंबित 24 अपीलों का निपटारा किया गया। किसानों ने मूल रूप से ₹7,000 प्रति एकड़ के मुआवजे के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था और ₹30,000 प्रति एकड़ की मांग की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अब मुआवजे की राशि को ₹23,000 प्रति एकड़ पर तय किया गया है, जिससे प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिली है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 1983 में सरकार ने बिजली सब-स्टेशन परियोजना के लिए कुल 71.15 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। उस समय किसानों को प्रति एकड़ केवल ₹7,000 का मुआवजा दिया गया था। चार दशकों तक चले इस कानूनी संघर्ष में किसान न्याय की आस में थे, जिसे अंततः लोक अदालत के माध्यम से सुलझा लिया गया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के समाधान न केवल किसानों को वित्तीय राहत प्रदान करते हैं, बल्कि न्याय प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र दशकों पुराने लंबित मामलों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर सकता है।

लोक अदालतें भारत में त्वरित और किफायती न्याय सुनिश्चित करने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं।

इस प्रक्रिया में ऊर्जा विभाग, राजस्व विभाग और भूमि प्रशासन के मुख्य आयुक्त सहित सभी हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। DLSA के अध्यक्ष बी. साई कल्याणचक्रवर्ती और सचिव सैयद जियाउद्दीन के नेतृत्व में यह सफल कवायद संपन्न हुई।

इसके अलावा, लोक अदालत में अन्य महत्वपूर्ण मामलों का भी निपटारा किया गया, जिसमें एक मोटर दुर्घटना दावा ₹96 लाख में और एक संपत्ति विभाजन विवाद ₹2 करोड़ में सुलझाया गया। गुंटूर DLSA ने लगातार पांच बार नागरिक मामलों के निपटारे में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

Did You Know?: राष्ट्रीय लोक अदालतें भारत में विवादों को अदालत के बाहर सुलझाने के लिए एक विशेष मंच प्रदान करती हैं, जिससे कानूनी खर्च और समय दोनों की बचत होती है।

Frequently Asked Questions

1. किसानों को अब कितना मुआवजा मिलेगा?
किसानों को अधिग्रहित भूमि के लिए ₹23,000 प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाएगा।

2. यह विवाद कितने समय से लंबित था?
यह भूमि अधिग्रहण विवाद लगभग 40 वर्षों (1983 से) से लंबित था।