कोझिकोड में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी बायोलॉजिकल पार्क और टाइगर सफारी परियोजना फंड की भारी कमी और राजनीतिक बदलाव के कारण संकट में है।

  • नवीनतम बजट में आवंटन न होने के कारण कोझिकोड बायोलॉजिकल पार्क परियोजना रुक गई है।
  • LDF सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल को आगे बढ़ाने में वर्तमान UDF सरकार की अनिच्छा के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।
  • परियोजना के तहत 120 हेक्टेयर वन भूमि पर टाइगर सफारी और एनिमल हॉस्पिस सेंटर बनाने की योजना थी।

पेरुवनमुझी के पास मुथुकड में प्रस्तावित कोझिकोड बायोलॉजिकल पार्क, जिसे एक अत्याधुनिक टाइगर सफारी पार्क के रूप में задума गया था, अब अपनी चमक खो चुका है। फंड की भारी कमी और वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में कमी के कारण यह बहु-करोड़ परियोजना पूरी तरह से ठप हो गई है। आधारशिला रखे जाने के कई महीनों बाद भी, पहले चरण का कोई भी महत्वपूर्ण कार्य पूरा नहीं हुआ है।

परियोजना का भविष्य अब राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ गया है। स्थानीय प्रशासकों ने आशंका जताई है कि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार, पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल में रुचि नहीं ले रही है। बजट में नए फंड का आवंटन न होना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक संरक्षण और राजनीतिक ब्रांडिंग के बीच के टकराव को दर्शाती है। जब बुनियादी ढांचा परियोजनाएं दीर्घकालिक राज्य नीति के बजाय विशिष्ट राजनीतिक शासन से जुड़ी होती हैं, तो सत्ता परिवर्तन के दौरान वे 'पॉलिसी पैरालिसिस' का शिकार हो जाती हैं।

चक्कितपारा के स्थानीय निकाय सदस्यों ने आरोप लगाया है कि यह परियोजना केवल LDF सरकार की चुनावी रणनीति का हिस्सा थी। उनका दावा है कि फरवरी 2026 में रखी गई आधारशिला केवल एक प्रतीकात्मक कदम था, जिसके पीछे न तो केंद्र सरकार से मंजूरी लेने की उचित योजना थी और न ही बजट का कोई ठोस रोडमैप।

कोझिकोड बायोलॉजिकल पार्क का रुकना इस बात का उदाहरण है कि कैसे पर्यावरण बुनियादी ढांचे के प्रति द्विदलीय प्रतिबद्धता की कमी संसाधनों की बर्बादी का कारण बनती है।

ऐतिहासिक रूप से, इस परियोजना की परिकल्पना चक्कितपारा गांव की उभरती पर्यटन संभावनाओं को देखते हुए की गई थी। वरिष्ठ वन अधिकारियों के एक आठ सदस्यीय पैनल ने क्षेत्र का अध्ययन करने के बाद चक्कितपारा को सबसे उपयुक्त स्थान चुना था। इसके बाद, 120 हेक्टेयर वन भूमि का सर्वेक्षण किया गया, जो वर्तमान में प्लांटेशन कॉर्पोरेशन ऑफ केरल के पास लीज पर है।

योजना के अनुसार, वायनाड के सुल्तान बथेरी स्थित एनिमल हॉस्पिस सेंटर से छह बाघों को यहाँ स्थानांतरित किया जाना था। हालांकि शुरुआती खर्चों के लिए ₹2 करोड़ आवंटित किए गए थे, लेकिन निरंतर फंडिंग की कमी ने अब एनिमल हॉस्पिस सेंटर के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है।

विशेषतायोजनाबद्ध विवरणवर्तमान स्थिति
भूमि क्षेत्र120 हेक्टेयरसर्वेक्षण पूर्ण, कार्य बंद
मुख्य आकर्षणटाइगर सफारी और हॉस्पिस सेंटरनिर्माण लंबित
प्रारंभिक फंड₹2 करोड़अपर्याप्त/समाप्त
राजनीतिक समर्थनLDF सरकारUDF के तहत अनिश्चित
क्या आप जानते हैं?: इस पार्क में जानवरों के लिए एक 'पेलिएटिव केयर' (उपशामक देखभाल) सुविधा बनाने की योजना थी, जो क्षेत्रीय बायोलॉजिकल पार्कों में एक दुर्लभ पहल है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कोझिकोड बायोलॉजिकल पार्क परियोजना क्यों रुक गई है?
मुख्य कारण बजट में फंड का अभाव और नई सरकार द्वारा पिछली सरकार की परियोजना को आगे बढ़ाने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है।

प्रश्न 2: इस पार्क का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य चक्कितपारा में पर्यटन को बढ़ावा देना और बुजुर्ग या घायल वन्यजीवों के लिए एक विशेष देखभाल केंद्र (हॉस्पिस सेंटर) स्थापित करना था।