हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कर्मचारियों की पांच लंबित डीए किस्तों और एरियर पर छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। कर्मचारियों ने भुगतान में भेदभाव का आरोप लगाया था।
- हाईकोर्ट ने सरकार को 6 हफ्ते के भीतर 5 लंबित डीए किस्तों पर निर्णय लेने का आदेश दिया।
- कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कुछ श्रेणियों को केंद्र की दरों पर डीए मिला, जबकि उनके साथ भेदभाव हुआ।
- न्यायालय ने 18 मई 2026 को सौंपे गए प्रतिवेदनों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
- सुक्खू सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अधिकतम पेंशन सीमा में भी वृद्धि की है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के लंबित भुगतान को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ ने आठ अलग-अलग रिट याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और सक्षम अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर कानून और सरकारी नियमों के अनुसार छह सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला लें।
याचिकाओं में यह मुद्दा उठाया गया था कि कर्मचारी 1 जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते के बकाए के हकदार हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक इस राशि का भुगतान नहीं किया है। कर्मचारियों का सबसे बड़ा आरोप 'भेदभाव' को लेकर था। उन्होंने दलील दी कि सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों के कर्मचारियों को केंद्र सरकार की दरों पर डीए प्रदान किया है, जबकि अन्य को इस लाभ से वंचित रखा गया है, जो कि समान कार्य और समान अधिकार के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह अदालती हस्तक्षेप हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर बड़ा दबाव डालता है। पांच किस्तों का लंबित होना एक बड़ी वित्तीय देनदारी को दर्शाता है। यह मामला स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार बजट की कमी और कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष कर रही है।
"जब न्यायपालिका प्रशासनिक देरी पर समय सीमा तय करती है, तो यह सरकार की उस प्रवृत्ति को रोकता है जिसमें फाइलों को अंतहीन नौकरशाही प्रक्रियाओं में उलझाकर भुगतान टाला जाता है।"
अदालत ने पाया कि कर्मचारियों ने 18 मई 2026 को अपनी मांगों के संबंध में सक्षम अधिकारियों को प्रतिवेदन सौंपे थे, लेकिन सुनवाई तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। हालांकि कोर्ट ने दावों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह सुनिश्चित किया कि सरकार नियमों के तहत देय बकाया राशि को जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
इस बीच, सुक्खू सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए राहत की घोषणा की है। 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों के लिए पेंशन और पारिवारिक पेंशन के नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे उनकी अधिकतम सीमा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
| पेंशन का प्रकार | पुरानी सीमा | संशोधित सीमा |
|---|---|---|
| अधिकतम पेंशन | ₹60,000 | ₹1,12,050 |
| अधिकतम पारिवारिक पेंशन | ₹40,000 | ₹67,230 |
वित्त विभाग ने इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं और बैंकों को आगाह किया है कि भुगतान में कोई गलती न हो। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पेंशनभोगी की मूल पेंशन तय सीमा से अधिक है, तो केवल इस आधार पर उनका बकाया भुगतान नहीं रोका जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: हाईकोर्ट ने सरकार को कितना समय दिया है?
अदालत ने सरकार को कर्मचारियों के लंबित डीए प्रतिवेदनों पर छह हफ्ते के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
इसका लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं।