पेपर लीक के आरोपों से भड़के कार्यकर्ताओं ने नवी मुंबई स्थित MPSC कार्यालय में घुसकर सचिव महेंद्र हरपालकर के चेहरे को काला कर दिया। इस घटना ने महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • सम्भजी ब्रिगेड के तीन कार्यकर्ताओं ने MPSC सचिव महेंद्र हरपालकर के चेहरे पर काला पाउडर फेंका।
  • आरोपियों ने पेपर लीक के सबूत दिखाने के बहाने कार्यालय में प्रवेश किया था।
  • मुख्यमंत्री द्वारा SIT गठन की घोषणा के बावजूद छात्रों और कार्यकर्ताओं का आक्रोश बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के कार्यालय में शुक्रवार को उस समय भारी तनाव व्याप्त हो गया जब तीन कथित कार्यकर्ताओं ने घुसकर सचिव महेंद्र हरपालकर पर हमला कर दिया। आरोपियों ने हरपालकर के चेहरे और शरीर पर काला पाउडर फेंक दिया और उन्हें पेपर लीक में शामिल होने का आरोप लगाया। यह घटना नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित कार्यालय की 10वीं मंजिल पर दोपहर करीब 12:30 बजे हुई।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान श्रीकृष्ण उर्फ अन्नासाहब सावंत, सुहास लक्ष्मण राणे और योगेश शांतिलाल पाटिल के रूप में हुई है। एफआईआर के मुताबिक, ये तीनों व्यक्ति एक दिन पहले भी कार्यालय आए थे और दावा किया था कि उनके पास पेपर लीक के पुख्ता डिजिटल सबूत हैं। सचिव ने उन्हें डिजिटल डिवाइस लाने की अनुमति दी थी, जिसका फायदा उठाकर उन्होंने शुक्रवार को इस हमले को अंजाम दिया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this incident is not merely a random act of violence but a symptom of deep-seated systemic failure in the state's recruitment process. When aspirants lose faith in the integrity of the examination body, the frustration often manifests as street aggression. The fact that this happened despite the Chief Minister's SIT announcement suggests that the public no longer trusts administrative probes and is demanding immediate resignations.

"The transition from peaceful protests to targeted attacks on officials indicates a complete breakdown of trust between the youth and the state's administrative machinery."

राजनीतिक मोर्चे पर, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और शिव सेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे ने इस मुद्दे को गरमा दिया है। हालांकि रोहित पवार ने हिंसा का समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने सचिव और अध्यक्ष विवेक भिमनवर के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात कर न्यायिक जांच की मांग की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में MPSC की परीक्षाएं पिछले कुछ समय से विवादों के केंद्र में रही हैं। बार-बार पेपर लीक होने की खबरों और परीक्षाओं के स्थगित होने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जिससे राज्य भर में छात्र आंदोलनों की एक लहर उठी है।

पक्ष मुख्य मांग/तर्क
सम्भजी ब्रिगेड भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक आक्रोश की अभिव्यक्ति।
विपक्ष (NCP/Shiv Sena) न्यायिक जांच और शीर्ष अधिकारियों का तत्काल इस्तीफा।
सरकार SIT जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चेतावनी।
Did You Know?: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक संस्था है, जो डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए चयन करती है।

Frequently Asked Questions

1. MPSC सचिव पर हमला क्यों किया गया?
आरोपियों का दावा है कि आयोग के अधिकारी पेपर लीक करने में शामिल थे और वे इस भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे थे।

2. सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री ने कथित कदाचार की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।