बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक अनूठी पहल 'प्रसाद टू पावर' शुरू की है, जिसके तहत लालबागचा राजा मंडल के जैविक कचरे से बिजली बनाकर सरकारी अस्पतालों को रोशन किया जाएगा।

  • प्रतिदिन 8-10 मीट्रिक टन गीले कचरे का पुनर्चक्रण किया जाएगा।
  • 10 दिनों के उत्सव के दौरान कुल 7,744 यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होगा।
  • उत्पन्न बिजली का उपयोग KEM, सायन, कस्तूरबा और GTB अस्पतालों में किया जाएगा।

मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित गणेश मंडलों में से एक, लालबागचा राजा, अब केवल अपनी आध्यात्मिक आभा के लिए ही नहीं, बल्कि एक पर्यावरण-अनुकूल पहल के लिए भी जाना जाएगा। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक अभूतपूर्व परियोजना 'प्रसाद टू पावर' (Prasad to Power) की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, उत्सव के दौरान निकलने वाले भारी मात्रा में फूलों और प्रसाद के कचरे को बिजली में बदला जाएगा।

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, गणेश चतुर्थी के 11 दिनों के दौरान प्रतिदिन लगभग 8 से 10 मीट्रिक टन जैविक कचरा एकत्र किया जाएगा। इस कचरे को शहर के चार प्रमुख नागरिक और सरकारी अस्पतालों—किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM), कस्तूरबा, GTB और सायन अस्पताल—के बायोमेथेनेशन प्लांट में भेजा जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह परियोजना केवल कचरा प्रबंधन नहीं है, बल्कि यह धार्मिक परंपराओं और आधुनिक स्थिरता (Sustainability) के बीच एक सेतु है। यह दर्शाता है कि कैसे बड़े पैमाने पर होने वाले सार्वजनिक उत्सवों को 'जीरो वेस्ट' मॉडल में बदला जा सकता है, जिससे शहरी बुनियादी ढांचे पर बोझ कम होता है और स्वास्थ्य सेवाओं को लाभ मिलता है।

"यह पहल स्रोत पृथक्करण और वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण के माध्यम से शहरी कचरे को एक मूल्यवान संसाधन में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।"

प्रत्येक अस्पताल के पास प्रतिदिन लगभग दो मीट्रिक टन गीले कचरे को संसाधित करने की क्षमता है। BMC का लक्ष्य कुल 80 मीट्रिक टन जैविक कचरे को संसाधित कर लगभग 7,744 यूनिट बिजली पैदा करना है। यह बिजली मुख्य रूप से अस्पतालों के वार्डों, गलियारों और सामान्य क्षेत्रों को रोशन करने के लिए उपयोग की जाएगी।

ऐतिहासिक रूप से, मुंबई के बड़े पंडालों से निकलने वाला कचरा लैंडफिल में जाता था, जिससे प्रदूषण बढ़ता था। लेकिन इस नई प्रणाली के साथ, कचरा संग्रहण से लेकर ऊर्जा उत्पादन तक की एक पूरी चक्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) तैयार की गई है।

क्या आप जानते हैं?: बायोमेथेनेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक कचरे को तोड़कर मीथेन गैस बनाते हैं, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: 'प्रसाद टू पावर' योजना के तहत किन अस्पतालों को लाभ होगा?
उत्तर: इस योजना से KEM, सायन, कस्तूरबा और GTB जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों को बिजली मिलेगी।

प्रश्न 2: इस परियोजना से कुल कितनी बिजली पैदा होने की उम्मीद है?
उत्तर: BMC का अनुमान है कि उत्सव के दौरान लगभग 7,744 यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होगा।