प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) के गठन के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो विशेष डाक टिकट जारी किए हैं, जो वैश्विक दक्षिण की बढ़ती शक्ति का प्रतीक हैं।
- पीएम मोदी ने ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने पर दो स्मारक डाक टिकट लॉन्च किए।
- पूर्व राजदूत मीरा शंकर ने ब्रिक्स को 'गैर-पश्चिमी' समूह बनाने पर जोर दिया।
- भारत चीन के प्रभुत्व को रोकने और वैश्विक शासन में विकासशील देशों की आवाज बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) के 20 साल पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर दो नए डाक टिकट जारी कर इस समूह की यात्रा और उपलब्धियों का सम्मान किया है। यह कदम न केवल इस संगठन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारत वैश्विक राजनीति में एक संतुलित शक्ति के रूप में उभर रहा है।
इस अवसर पर पूर्व भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने एक गहन विश्लेषण साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य ब्रिक्स को एक 'गैर-पश्चिमी' (Non-Western) समूह के रूप में स्थापित करना है, न कि एक 'पश्चिम-विरोधी' (Anti-Western) समूह के रूप में। यह रणनीतिक अंतर भारत की उस विदेश नीति को दर्शाता है जहाँ वह अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखना चाहता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत ब्रिक्स के भीतर एक ऐसा वातावरण बनाना चाहता है जहाँ विकासशील देशों को वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन साथ ही वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह मंच चीन के प्रभुत्व का साधन न बन जाए। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की इच्छा डॉलर के विकल्प के रूप में युआन (Yuan) को अपनाने की तुलना में अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण है।
"भारत को वैश्विक शासन में विकासशील राष्ट्रों की आवाज को मजबूत करना चाहिए, लेकिन चीनी प्रभुत्व को रोकने के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।"
भारत-चीन संबंधों पर चर्चा करते हुए, मीरा शंकर ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, संबंधों में वास्तविक स्थिरता तभी आएगी जब सीमा विवादों पर ठोस प्रगति होगी और व्यापार असंतुलन को दूर किया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ब्रिक्स (BRICS) की शुरुआत मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन के रूप में हुई थी, जिसमें बाद में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ। पिछले दो दशकों में, यह समूह वैश्विक जीडीपी और जनसंख्या के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता हुआ एक शक्तिशाली आर्थिक ब्लॉक बन गया है, जो G7 जैसे पारंपरिक पश्चिमी समूहों को चुनौती दे रहा है।
Frequently Asked Questions
1. ब्रिक्स को 'गैर-पश्चिमी' समूह क्यों कहा जा रहा है?
इसका अर्थ है कि समूह पश्चिमी देशों के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह अपनी स्वतंत्र पहचान और विकासशील देशों की जरूरतों के लिए एक वैकल्पिक मंच प्रदान करता है।
2. भारत-चीन संबंधों में मुख्य बाधा क्या है?
मुख्य बाधाएं अनसुलझे सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच व्यापार का भारी असंतुलन हैं।