नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी ने आबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद से मुलाकात की। इस बैठक में ओडिशा में एल्युमिनियम क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई।

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  • ओडिशा में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर की एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना का स्वागत।
  • रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और नवाचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
  • ब्रिक्स (BRICS) मंच के माध्यम से साझा हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समानांतर आबू धाबी के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख खालिद बिन मोहम्मद के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाना था, जो राजनीतिक, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक संबंधों की नींव पर टिकी है।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने हाल के राजनयिक दौरों का उल्लेख किया, जिसमें जनवरी 2026 में यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा शामिल थी। इन यात्राओं ने दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद की निरंतरता को सुनिश्चित किया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुलाकात केवल राजनयिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि भारत के औद्योगिक मानचित्र को बदलने वाला कदम है। ओडिशा में प्रस्तावित 11.5 अरब डॉलर का निवेश भारत को वैश्विक एल्युमिनियम आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। यह निवेश न केवल रोजगार पैदा करेगा बल्कि भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को नई ऊर्जा देगा।

भारत और यूएई के बीच यह आर्थिक तालमेल वैश्विक दक्षिण (Global South) की उभरती आर्थिक शक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी द्वारा ओडिशा में किए जाने वाले निवेश की सराहना की। यह भारत के एल्युमिनियम क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा एकीकृत निवेश है, जिससे ओडिशा एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित होगा।

इसके अतिरिक्त, चर्चा में यूएई के नवीनतम संप्रभु निवेश कोष 'ल’इमाद' की भूमिका पर भी जोर दिया गया। इसे भारत-यूएई साझेदारी को और गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण के रूप में देखा जा रहा है। रणनीतिक चर्चाओं में अंतरिक्ष अन्वेषण, परमाणु ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे भविष्य के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।

क्या आप जानते हैं?: यूएई और भारत के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) व्यापार बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रमुख निवेश और सहयोग क्षेत्र

क्षेत्रविवरण/निवेशसंभावित प्रभाव
एल्युमिनियम (ओडिशा)$11.5 बिलियनवैश्विक विनिर्माण केंद्र का निर्माण
निवेश कोषल’इमाद (L'Imad)रणनीतिक पूंजी प्रवाह में वृद्धि
रणनीतिक क्षेत्ररक्षा और अंतरिक्षतकनीकी आत्मनिर्भरता और सुरक्षा

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ओडिशा में प्रस्तावित निवेश का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य एक एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना विकसित करना है, जिससे ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

प्रश्न 2: ल’इमाद (L'Imad) क्या है?
उत्तर: ल’इमाद यूएई का नवीनतम संप्रभु निवेश कोष है, जिसका उपयोग भारत-यूएई साझेदारी के तहत पारस्परिक लाभ के लिए निवेश करने में किया जाएगा।