पलाक्कड़ में आयोजित 30वें ग्लोबल प्रोफेशनल स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस (Profcon) में महिला छात्रों द्वारा इंटर्नशिप और फील्डवर्क के दौरान सामना किए जाने वाले भेदभाव और सुरक्षा चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

  • इंटर्नशिप और फील्डवर्क के दौरान महिला छात्रों की सुरक्षा और आवास की कमी पर जोर दिया गया।
  • पितृसत्तात्मक विचारों और महिलाओं की पहचान के व्यवसायीकरण के खिलाफ आवाज उठाई गई।
  • मंत्री के.ए. थुलसी ने महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

पलाक्कड़ के कांजीकोड स्थित अहलिया कैंपस में आयोजित 30वें ग्लोबल प्रोफेशनल स्टूडेंट्स कॉन्फ्रेंस (Profcon) ने पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को एक प्रमुख मुद्दा बना दिया है। इस सम्मेलन में विशेष रूप से उन चुनौतियों पर चर्चा की गई जिनका सामना महिला छात्र इंटर्नशिप और फील्डवर्क के दौरान करती हैं।

विजडम इस्लामिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में एक विशेष महिला सत्र का आयोजन किया गया। इसमें सिविल इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों के दौरान फील्डवर्क करने वाली छात्राओं द्वारा सुरक्षित आवास की कमी जैसी शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की गई। सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि महिला छात्रों को उन पितृसत्तात्मक धारणाओं का मुकाबला करना चाहिए जो उन्हें हीन भावना महसूस कराने की कोशिश करती हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पेशेवर शिक्षा में लैंगिक समानता केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि इंटर्नशिप के दौरान सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव होगा, तो देश की एक बड़ी प्रतिभा कार्यबल से बाहर हो सकती है।

महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए, और महिलाओं को उपलब्ध अवसरों का पूरी क्षमता से लाभ उठाना चाहिए।

एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के.ए. थुलसी ने सत्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि छात्राओं को अपनी प्रतिभा को पहचानना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ अपनी कमियों को दूर करना चाहिए। उन्होंने उन ताकतों के प्रति भी आगाह किया जो लोकतंत्र को कमजोर करने और इतिहास को मिटाने का प्रयास करती हैं।

इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों महिला छात्र शामिल हुईं। वक्ताओं में पीस रेडियो के सीईओ हैरिस बिन सलीम, हमसा मदनी और ज़हरा सुल्लमिया सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

Historical Background

भारत में पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन कार्यस्थल और फील्डवर्क के दौरान सुरक्षा संबंधी मुद्दे अभी भी एक बड़ी बाधा बने हुए हैं। विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संगठन अब 'सेफ वर्कप्लेस' नीतियों पर जोर दे रहे हैं।

Did You Know?: भारत में इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं का नामांकन बढ़ रहा है, लेकिन नेतृत्वकारी भूमिकाओं में उनकी संख्या अभी भी कम है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्रोफ़कॉन (Profcon) क्या है?
उत्तर: यह एक वैश्विक पेशेवर छात्र सम्मेलन है जो छात्रों के विकास और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करता है।

प्रश्न 2: सम्मेलन में मुख्य मुद्दा क्या था?
उत्तर: मुख्य मुद्दा पेशेवर शिक्षा और इंटर्नशिप के दौरान महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और सुरक्षा की कमी था।