नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति तुकाेव से द्विपक्षीय बैठक की। इस बीच, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत छोड़कर शिखर सम्मेलन समाप्त कर रहे हैं।
- मॉदी ने कज़ाख़स्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की
- चीन और रूस शिखर सम्मेलन के बाद भारत छोड़कर लौटे
- भारत ने ब्रिक्स के बहुपक्षीय मंच पर अपनी भूमिका मजबूत की
ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन, जो 2026 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति तुकाेव के साथ एक द्विपक्षीय बैठक में भाग लिया, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा संसाधनों के सहयोग और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ाने के लिए संयुक्त पहल पर सहमति व्यक्त की। कज़ाख़स्तान को भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार माना जाता है, और इस संवाद ने दोनों देशों के बीच निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दी।
साथ ही, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शिखर सम्मेलन के बाद भारत छोड़कर अपनी-अपनी यात्राएँ जारी रखीं, जिससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने का मौका मिला।
ब्रिक्स के अन्य प्रमुख नेताओं, जिनमें मिस्र और फिलीपींस के अध्यक्ष भी शामिल थे, ने भी मोदी के साथ बैठकें की, जिससे भारत को दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक स्थिति सुदृढ़ करने का अवसर मिला।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण बताता है कि मोदी की कज़ाख़स्तान के साथ गहरी चर्चा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करती है। यह कदम भारत को मध्य एशिया में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है, जिससे वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य पर प्रभाव पड़ता है।
"भारत का कज़ाख़स्तान के साथ सहयोग क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है," कहते हैं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर डॉ. सुमन पांडे।
Frequently Asked Questions
1. क्या मोदी का कज़ाख़स्तान के साथ कोई नया व्यापारिक समझौता हुआ?
हाँ, दोनों पक्षों ने ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में सहयोग के लिए एक ढांचा समझौता पर हस्ताक्षर किए।
2. शिखर सम्मेलन के बाद चीन और रूस ने भारत क्यों छोड़ा?
दोनों राष्ट्रों ने अपनी यात्राएँ जारी रखीं और शिखर सम्मेलन के बाद अपने-अपने देशों के साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेने का निर्णय लिया।