प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व सहपाठी असगरअली वोहरा ने उनसे मुलाकात कर महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में एक पुराने भूमि विवाद की शिकायत की है। उन्होंने भाजपा विधायक से जुड़े बिल्डरों पर जाली दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने का आरोप लगाया है।
- 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने पीएम मोदी से मुलाकात कर जमीन हड़पने की शिकायत की।
- आरोप है कि भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़े बिल्डरों ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
- शिकायतकर्ता ने इस मामले में सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के सहपाठी, 81 वर्षीय असगरअली वोहरा ने हाल ही में प्रधानमंत्री से मुलाकात की और महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर में दशकों पुराने एक भूमि विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। वोहरा, जिन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ पढ़ाई की थी, ने प्रधानमंत्री को एक पत्र सौंपकर इस मामले में CBI जांच की मांग की है।
वोहरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में भायंदर पूर्व के नवघर रोड पर लगभग 2,810 वर्ग मीटर जमीन कानूनी रूप से खरीदी थी। उनका आरोप है कि 2011 में स्वयं बिल्डर्स (Swayam Builders) के साथ मिलीभगत कर जाली दस्तावेज तैयार किए गए और उनकी जानकारी के बिना ही संपत्ति को दो हिस्सों में बांट दिया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत संपत्ति विवाद नहीं है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करके सरकारी तंत्र को प्रभावित करने का एक बड़ा उदाहरण होगा।
दशकों पुराने भूमि विवादों में जाली दस्तावेजों का खेल अक्सर सत्ता के गलियारों से जुड़ा होता है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
वोहरा ने विशेष रूप से सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस (Seven Eleven Constructions) पर निशाना साधा है, जिसे भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा-भायंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग ने उनके स्वामित्व के दावे के बावजूद निर्माण की अनुमति दे दी।
मामले की जटिलता तब और बढ़ जाती है जब वोहरा बताते हैं कि 2015 में दर्ज की गई FIR के मामले में CID रिपोर्ट 11 साल बाद, यानी 2026 में पेश की गई। उन्होंने इस देरी को राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अवैध निर्माण के मामले लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। मीरा-भायंदर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में, रियल एस्टेट माफिया और राजनीतिक गठजोड़ अक्सर स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. असगरअली वोहरा ने पीएम मोदी से क्या मांग की है?
उन्होंने मीरा-भायंदर में भूमि हड़पने के मामले में सीबीआई (CBI) द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की है।
2. विवाद का मुख्य केंद्र क्या है?
विवाद 1989 में खरीदी गई भूमि के जाली दस्तावेजों के माध्यम से अवैध कब्जे और बिल्डरों की मिलीभगत से संबंधित है।