कर्नाटक सरकार ने 2026 के मिनर इरिगेशन और जल निकाय जनगणना के तहत 14.18 लाख भूजल कुओं और 39,000 जल निकायों का विस्तृत मानचित्रण किया है। इस डेटा से राज्य की जल सुरक्षा योजनाओं में सुधार और कृषि जल संसाधन प्रबंधन पर असर पड़ेगा।
- कर्नाटक में 14.18 लाख भूजल स्रोतों का पता चला
- लगभग 39,000 झीलें और जल निकायों की पहचान हुई
- डेटा से जल संरक्षण और सिंचाई योजनाओं में बदलाव की उम्मीद
कर्नाटक के सातवें मिनर इरिगेशन जनगणना और दूसरे जल निकाय जनगणना ने 2026 में 77,573 सतही जल योजनाओं, 39,000 झीलों और 14.18 लाख भूजल कुओं का विस्तृत मानचित्रण किया है। यह आँकड़ा 2023‑24 के आधार पर तैयार किया गया है और इसमें 30,671 गाँव, 300 नगरपालिकाएँ और 7,128 वार्ड शामिल हैं।
यह व्यापक डेटा केवल कृषि उपयोग के लिए भूजल स्रोतों को दर्शाता है, शहरी पेयजल के लिए नहीं। 38,960 जल निकायों ने 2,000 हेक्टेयर के कमांड क्षेत्र को कवर किया है, जिससे राज्य की जल संसाधन प्रबंधन क्षमता में सुधार का मार्ग खुला है।
राज्य के कृषि एवं जल विज्ञान मंत्री अजय सिंह ने कहा, "यह डेटा हमें सूखे प्रभावित इलाकों में जल सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने, तालाबों की पुनरुद्धार और जल पुनर्भरण योजनाओं को लागू करने में मदद करेगा।"
अगस्त 2026 में पूर्ण हुए क्षेत्र कार्य से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर, सरकार जल पुनर्भरण, चेक डैम निर्माण और टैंक भरने की योजनाओं को डेटा‑ड्रिवन तरीके से आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
इस वर्ष के जल संसाधन मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भूजल निकासी 68.44% से घटकर 66.49% हो गई, जबकि वार्षिक पुनर्भरण क्षमता 18.74 अरब क्यूबिक मीटर से बढ़कर 19.28 अरब क्यूबिक मीटर हो गई।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक में यह विस्तृत मानचित्रण कृषि उत्पादकता और जल संरक्षण नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है। भूजल और सतही जल स्रोतों के सटीक डेटा से किसान और नीति‑निर्माता दोनों को जल का कुशल उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।
"सटीक भूजल मानचित्रण जल संकट से लड़ने का पहला कदम है," कहते हैं जल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार।
Frequently Asked Questions
- कर्नाटक में भूजल कुओं की संख्या क्यों इतनी अधिक है?
- यह डेटा किसानों को किस प्रकार लाभ पहुंचाएगा?