आंध्र प्रदेश के अनंतमया जिले में स्थित गट्टुमीडापल्ले गाँव अब एक 'घोस्ट विलेज' में बदल चुका है। सूखे और कृषि संकट के कारण यहाँ के निवासी पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।
- गट्टुमीडापल्ले गाँव में पिछले 10 वर्षों में पूरी आबादी पलायन कर गई है।
- बार-बार फसल की विफलता और गिरते भूजल स्तर ने मुख्य कारण का काम किया।
- मूँगफली की खेती पर आधारित यह गाँव अब केवल एक मोबाइल टावर का ठिकाना है।
आंध्र प्रदेश के अनंतमया जिले में स्थित गट्टुमीडापल्ले गाँव की कहानी आज के समय में जलवायु परिवर्तन और कृषि संकट की एक भयावह तस्वीर पेश करती है। तिरुपति से लगभग 125 किमी दूर स्थित यह गाँव, जो कभी मूँगफली की खेती का एक संपन्न केंद्र हुआ करता था, अब पूरी तरह से वीरान हो चुका है। पिछले एक दशक के भीतर, यहाँ के लगभग सभी परिवार जीविका की तलाश में पलायन कर चुके हैं।
कृषि संकट और जल संकट का कहर
गट्टुमीडापल्ले कभी लगभग 1,000 एकड़ में फैला हुआ था, जिसमें से 300 एकड़ भूमि मूँगफली की खेती के लिए उपयोग की जाती थी। लेकिन मौसम की अनिश्चितता और गिरते भूजल स्तर ने यहाँ के किसानों की कमर तोड़ दी। जब बारिश पर निर्भर फसलें बार-बार विफल होने लगीं, तो ग्रामीणों के पास कोई विकल्प नहीं बचा। शुरुआत में, कुछ परिवारों ने एक बोरवेल के पानी पर गुजारा करने की कोशिश की, लेकिन अंततः पानी की भारी कमी ने उन्हें भी गाँव छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
BozokMedia विश्लेषण: पलायन का सिलसिला
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह पलायन अचानक नहीं हुआ, बल्कि एक धीमी प्रक्रिया थी। साल 2015 में, कुछ परिवारों ने कोसुवरिपालले या मदनापल्ले जैसे नजदीकी कस्बों में जाना शुरू किया। जो लोग रुक गए थे, वे उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन जब समाधान की कोई किरण नहीं दिखी, तो दहशत और मजबूरी में पूरा गाँव खाली हो गया।
'मैंने अपने गाँव को हमेशा के लिए पीछे छोड़ दिया है; अब यहाँ वापस आने की कोई इच्छा नहीं है।' - थिम्मक्कगारी सुब्बी रेड्डी, पूर्व किसान।
गाँव के खाली होने के बाद, यहाँ की स्थिति और भी बदतर हो गई है। खाली पड़े घरों में चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। यहाँ तक कि मंदिर की घंटी तक नहीं बची। जो घर कभी चहल-पहल से भरे थे, आज वहाँ केवल धूल और सन्नाटा है। स्कूल बंद हो चुके हैं और हैंडपंप सूख चुके हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश का यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से कृषि प्रधान रहा है। मूँगफली यहाँ की मुख्य नकदी फसल थी, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में वर्षा के पैटर्न में बदलाव और भूजल के अत्यधिक दोहन ने इस पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: गट्टुमीडापल्ले गाँव के खाली होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण बार-बार फसल की विफलता, पानी की कमी और गिरता भूजल स्तर है।
प्रश्न 2: ग्रामीण अब कहाँ बस गए हैं?
उत्तर: अधिकांश ग्रामीण अब कोसुवरिपालले या मदनापल्ले जैसे नजदीकी शहरों में दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए चले गए हैं।