अग्रतला में हाल ही में हुई हिंसा के बाद त्रिपुरा सरकार ने 19 अवैध नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान की है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इन केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
- त्रिपुरा सरकार ने 19 अनधिकृत नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान की।
- अग्रतला के 'स्वप्न फाउंडेशन' में हिंसा की घटना के बाद यह कार्रवाई की गई।
- सभी केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
- पंजीकरण के बिना केंद्र चलाना कानूनन अपराध है।
त्रिपुरा सरकार ने राज्य में संचालित हो रहे अवैध नशा मुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास केंद्रों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने हाल ही में 19 ऐसे 'अनधिकृत' निजी केंद्रों की पहचान की है, जो बिना किसी वैध पंजीकरण के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यह सख्त कदम अग्रतला के एक पुनर्वास केंद्र में हाल ही में हुई हिंसा की घटना के बाद उठाया गया है।
हिंसा के बाद प्रशासन सख्त
अधिकारियों के अनुसार, अग्रतला स्थित 'स्वप्न फाउंडेशन', जहाँ हाल ही में एक आपराधिक घटना हुई थी, को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्राधिकरण ने आरोप लगाया है कि ये केंद्र न केवल पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहे हैं, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे की कमी, प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव और सुरक्षा व्यवस्था की भारी कमी पाई गई है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अनधिकृत केंद्रों का उदय मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के व्यवसायीकरण और नियामक खामियों को दर्शाता है। जब पुनर्वास केंद्र कानूनी मानकों का पालन नहीं करते, तो वे उपचार के बजाय मरीजों के लिए जोखिम का केंद्र बन जाते हैं। यह मामला दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है।
बिना पंजीकरण के मानसिक स्वास्थ्य केंद्र चलाना मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत एक गंभीर कानूनी अपराध है।
प्राधिकरण ने इन केंद्रों के प्रबंधन को नोटिस का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। यदि वे संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 65(1) के तहत बिना सक्षम अधिकारी के पंजीकरण के कोई भी सुविधा संचालित करना पूरी तरह अवैध है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ निजी केंद्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। हालांकि, 2017 का मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम यह सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था कि सभी सुविधाएं मानकीकृत हों और मरीजों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. त्रिपुरा सरकार ने यह कार्रवाई क्यों की?
अग्रतला के एक केंद्र में हुई हिंसा और अनधिकृत केंद्रों द्वारा मरीजों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई।
2. इन केंद्रों पर कौन सा कानून लागू होता है?
इन केंद्रों पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 लागू होता है।