रविवार को तुर्की अधिकारियों ने LGBTQ+ और HIV सहायता समूहों पर व्यापक छापेमारी की, जिससे सैकड़ों सदस्य गिरफ्तार हुए और संगठन ब्लॉक किए गए। मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम को राजनीतिक दमन के रूप में निंदा की।
- तुर्की अधिकारियों ने LGBTQ+ और HIV सहायता समूहों पर व्यापक छापेमारी की।
- सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया और संगठनों के कार्यालयों पर तलाशी ली गई।
- मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम को राजनीतिक दमन के रूप में निंदा की।
रविवार की सुबह तुर्की के प्रमुख शहरों – इस्तांबुल, अंकारा, इज़मिर, आयदिन और मर्सिन – में पुलिस ने एक साथ छापेमारी की।
लक्ष्य थे LGBTQ+ अधिकार समूह और HIV जागरूकता संगठन, जिन्हें सरकार ने 'बच्चों और परिवारों की रक्षा' के बहाने पर निशाना बनाया।
कुल 162 संदिग्धों, नौ संगठनों और 13 व्यवसायों पर जांच की गई, और कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया।
तुर्की के मंत्री अकिन गुरलेक ने 10 साल पुरानी कार्यकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की ज़िम्मेदारी 'परिवार और बच्चों को सुरक्षित रखना' है।
ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन ने इस कार्रवाई को 'राजनीतिक अभियान' कहा, यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य LGBTQ+ समुदाय और स्वतंत्र नागरिक समाज को समाप्त करना है।
ऐतिहासिक रूप से, 1858 में ओटोमन साम्राज्य ने समलैंगिकता को अपराधमुक्त किया था, परन्तु आज भी सामाजिक भेदभाव और कानूनी असमानता बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इस कदम ने पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों से कड़ी आलोचना को जन्म दिया है, जिससे तुर्की की वैश्विक छवि पर असर पड़ सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such crackdowns not only stifle dissent but also undermine Turkey’s commitments under international human‑rights treaties.
इस तरह के दमन से LGBTQ+ समुदाय की आवाज़ें दबती हैं और वैश्विक मानवाधिकार मानकों पर सवाल उठते हैं।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या तुर्की सरकार ने LGBTQ+ समूहों पर कार्रवाई के लिए कोई कानूनी आधार दिया है?
A1: सरकार ने 10 साल पुरानी कार्यकारी आदेश का हवाला दिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
Q2: क्या इस कार्रवाई का HIV सहायता समूहों पर भी प्रभाव पड़ेगा?
A2: हाँ, कई HIV जागरूकता संगठनों की वेबसाइटें ब्लॉक की गई हैं, जिससे सूचना और सहायता पहुँच में बाधा आ रही है।