छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) परीक्षा में धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व ओएसडी चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन और प्रश्नपत्र लीक करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व ओएसडी चेतन बोरघरिया को ED ने PMLA के तहत गिरफ्तार किया।
- CGPSC 2020-21 परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पेपर लीक के आरोप।
- जांच में बोरघरिया के बैंक खातों में 66.64 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा।
- आरोप है कि प्रश्नपत्रों के वितरण के लिए विवाह हॉल और रिसॉर्ट का उपयोग किया गया।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षाओं (2020 और 2021) में कथित अनियमितताओं और हेरफेर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। बोरघरिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में कार्यरत थे, वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज में अतिरिक्त कलेक्टर के पद पर तैनात थे।
ED की यह कार्रवाई उस प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है जो फरवरी 2024 में आर्थिक अपराध शाखा (EOW/ACB), रायपुर द्वारा दर्ज की गई थी। इस मामले में भ्रष्टाचार और परीक्षा परिणामों में हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच के दौरान यह पता चला है कि आरोपियों ने उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की थी।
भ्रष्टाचार का तरीका: विवाह हॉल से रिसॉर्ट तक
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। ED के अनुसार, लीक किए गए प्रश्नपत्रों को वितरित करने के लिए रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस का उपयोग किया गया था। इसके बाद, मुख्य परीक्षा (Mains) के प्रश्नपत्रों के आधार पर कोचिंग देने के लिए उम्मीदवारों को बरनवापारा सैंचुरी रिसॉर्ट में ठहराया गया था। यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थी ताकि पकड़े जाने का डर न रहे।
जांच से स्पष्ट है कि सत्ता के करीबी पदों का उपयोग कर सरकारी परीक्षाओं की पवित्रता को आर्थिक लाभ के लिए खंडित किया गया।
BozokMedia विश्लेषण: सत्ता और भ्रष्टाचार का गठजोड़
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल एक परीक्षा घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता के शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों और बिचौलियों के बीच गहरे गठजोड़ को उजागर करता है। चेतन बोरघरिया के बैंक खातों में 170 लेनदेन के माध्यम से 66.64 लाख रुपये जमा किए जाने की बात सामने आई है। डिजिटल साक्ष्यों से पता चलता है कि बोरघरिया और उत्कर्षand्राकर के बीच पैसों के लेनदेन और मांग को लेकर निरंतर संवाद हो रहा था।
जांच में यह भी पाया गया कि M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited जैसी कंपनियों का उपयोग धन के लेन-देन को छिपाने (layering) के लिए किया जा रहा था। ED ने बोरघरिया के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनका फॉरेंसिक परीक्षण किया जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: CGPSC विवादों का इतिहास
छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता पिछले कुछ वर्षों से सवालों के घेरे में रही है। समय-समय पर पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में धांधली की खबरें आती रही हैं, जिसने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
Frequently Asked Questions
1. चेतन बोरघरिया पर क्या आरोप हैं?
उन पर CGPSC परीक्षा में धांधली के माध्यम से प्राप्त अवैध धन को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाने और भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप है।
2. इस मामले में ED की अब तक की कार्रवाई क्या है?
ED ने बोरघरिया को गिरफ्तार किया है, उनके बैंक खातों की जांच की है और उनके पास से डिजिटल उपकरण और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।