झांसी में आयोजित उत्तर प्रदेश डेयरी कॉन्क्लेव में महिलाओं के सशक्तिकरण और उद्यमिता पर जोर दिया गया, जहाँ 1,200 लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि भेजी गई।

  • 1,200 लाभार्थियों को ₹11 करोड़ से अधिक की DBT राशि हस्तांतरित की गई।
  • 22 नई बहुउद्देशीय दुग्ध सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाण पत्र दिए गए।
  • डेयरी विकास में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया (70% से अधिक महिला प्रतिभागी)।
  • 'नंद बाबा मिल्क मिशन' के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का लक्ष्य।

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देते हुए झांसी, कानपुर और चित्रकूट धाम मंडलों के लगभग 1,200 लाभार्थियों के बैंक खातों में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से ₹11 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि भेजी है। यह कदम राज्य के डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

झांसी में 11 सितंबर, 2026 को आयोजित तीन मंडलों के 'डेयरी कॉन्क्लेव' का मुख्य विषय 'डेयरी विकास में महिलाओं की भागीदारी और उद्यमिता' था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभों के बारे में जागरूक करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण समाज की संरचना को भी बदलेगी। डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की 70% से अधिक भागीदारी यह साबित करती है कि अब पशुपालन केवल आजीविका नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक परिवर्तन बन चुका है।

उत्तर प्रदेश की डेयरी आयुक्त धनलक्ष्मी के. (IAS) ने बताया कि 2022 की दुग्ध नीति के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹13.5 करोड़ का कोष भी जारी किया गया है। इसके साथ ही, 22 नई बहुउद्देशीय दुग्ध सहकारी समितियों को आधिकारिक पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो क्षेत्र में संगठित डेयरी उत्पादन को बढ़ावा देंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का विकास पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। मेरठ, आगरा और बरेली की सफलता के बाद, अब बुंदेलखंड क्षेत्र में भी पशुपालकों और नए उद्यमियों का भारी उत्साह देखा जा रहा है। 'नंद बाबा मिल्क मिशन' जैसी योजनाएं राज्य को डेयरी उत्पादन के वैश्विक मानचित्र पर लाने का प्रयास कर रही हैं।

कॉन्क्लेव के दौरान आधुनिक डेयरी उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया। इसमें Parag, Balini, Namaste India, Bhole Baba और Samarthya जैसे प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक और सेवाओं से जुड़ने का मौका मिला।

Did You Know?: उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का विस्तार करने के लिए सरकार 'नंद बाबा मिल्क मिशन' के माध्यम से सीधे किसानों तक वित्तीय सहायता पहुँचा रही है।

Frequently Asked Questions

1. डेयरी कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य डेयरी विकास में महिलाओं की भूमिका को बढ़ावा देना और सरकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था।

2. लाभार्थियों को सहायता कैसे प्रदान की गई?
सहायता राशि को Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा गया है।