नोएडा के सेक्टर 94 स्थित सुपरनोवा प्रोजेक्ट में रहने वाले 350 से अधिक परिवार दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि उनके घरों में टोंटों से कीड़े और बदबूदार काला पानी आ रहा है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं।

  • सुपरनोवा प्रोजेक्ट के 350 से अधिक परिवार दूषित पानी की समस्या से त्रस्त हैं।
  • निवासियों ने टोंटों और फ्लश से कीड़े और पीले-काले रंग का बदबूदार पानी आने की शिकायत की है।
  • बिल्डर द्वारा पानी के बकाया बिल न चुकाने के कारण गंगा जल की आपूर्ति बंद है।
  • प्रोजेक्ट वर्तमान में दिवालियापन (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रहा है।

नोएडा के सेक्टर 94 में स्थित प्रतिष्ठित सुपरनोवा रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के निवासी इस समय एक भयावह स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। जो कभी नोएडा के सबसे बेहतरीन प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता था, वहां अब निवासियों को पीने और नहाने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि टोंटों और फ्लश से कीड़े और पीले-काले रंग का बदबूदार पानी निकल रहा है।

एक पीड़ित परिवार की कहानी इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। एक असिस्टेंट प्रोफेसर, जिन्होंने करोड़ों रुपये खर्च कर यहाँ अपना 'सपनों का घर' खरीदा था, ने बताया कि उनके किचन और बाथरूम के टोंटों से कीड़े निकल रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह दिल तोड़ने वाला है। हम अपने घर में मेहमानों को बुलाने में भी शर्म महसूस करते हैं क्योंकि पानी की स्थिति इतनी खराब है कि फ्लश करने के बाद कमोड को दोबारा साफ करना पड़ता है।"

स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव

दूषित पानी का असर केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवासियों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रहा है। परिवारों ने रिपोर्ट किया है कि बच्चों को त्वचा संबंधी समस्याएं (Skin issues), चेहरे पर मुंहासे और गले में संक्रमण (Throat infections) हो रहे हैं। यहाँ तक कि वयस्कों में बालों के झड़ने की समस्या भी देखी जा रही है। शुद्ध पानी के लिए परिवारों को महंगे पैकेज्ड वॉटर और फिल्टर पर भारी खर्च करना पड़ रहा है, जो एक अस्थायी समाधान मात्र है।

पानी की यह गुणवत्ता न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।

क्यों पैदा हुआ यह संकट?

BozokMedia analysis shows कि इस संकट की जड़ें प्रशासनिक और वित्तीय लापरवाही में छिपी हैं। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के पदाधिकारियों के अनुसार, प्रोजेक्ट के बिल्डर (सुपरटेक रियल्टर्स) ने गंगा जल की आपूर्ति के लिए बकाया लगभग 72 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया है। जब तक यह बकाया राशि नहीं चुकाई जाती, जल विभाग गंगा जल की आपूर्ति बहाल करने को तैयार नहीं है।

वर्तमान में, निवासी बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं, लेकिन प्रोजेक्ट का प्रोसेसिंग प्लांट इस पानी को पूरी तरह साफ करने की क्षमता नहीं रखता। इसके परिणामस्वरूप, पानी का रंग काला-पीला हो गया है और उसमें कीड़े दिखाई दे रहे हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति

सुपरनोवा प्रोजेक्ट वर्तमान में एक जटिल कानूनी दौर से गुजर रहा है। सुपरटेक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड वर्तमान में कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक तीन सदस्यीय समिति इस मामले की निगरानी कर रही है। निवासियों ने अपनी शिकायतों को इस समिति के समक्ष भी उठाया है, लेकिन समाधान में अभी भी लंबा समय लगने की संभावना है।

Did You Know?: नोएडा के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में पानी की समस्या बिल्डर द्वारा बकाया बिलों और मेंटेनेंस फंड के कुप्रबंधन के कारण पैदा होती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सुपरनोवा प्रोजेक्ट में पानी की समस्या का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारण बिल्डर द्वारा गंगा जल विभाग के लगभग 72 लाख रुपये के बकाया बिलों का भुगतान न करना है, जिसके कारण जलापूर्ति बंद है।

प्रश्न 2: क्या निवासी इस समस्या के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, निवासी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त दिवालियापन समाधान समिति और उपभोक्ता अदालतों का दरवाजा खटखटा सकते हैं।