केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 300 MW से 800 MW बिजली खरीदने हेतु टेंडर जारी किया है। मानसून के कारण उत्पन्न बिजली संकट से निपटने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • KSEB अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक के लिए 300 MW से 800 MW बिजली की खरीद करेगा।
  • यह कदम मानसून के दौरान बढ़ते बिजली संकट और रात में बिजली कटौती से निपटने के लिए उठाया गया है।
  • निविदाएं DEEP ई-बिडिंग पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित की गई हैं।

केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) वर्तमान में गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, बोर्ड ने आगामी तीन महीनों (अक्टूबर से दिसंबर 2026) के लिए बिजली की कमी को दूर करने हेतु एक व्यापक निविदा (Tender) जारी की है। इस योजना के तहत, बोर्ड 300 मेगावाट (MW) से लेकर 800 मेगावाट तक की अतिरिक्त बिजली खरीदने की तैयारी कर रहा है।

यह संकट विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान उत्पन्न हुआ है, जिसके कारण राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन पैदा हो गया है। पिछले कुछ समय से KSEB को रात के समय बिजली कटौती (Power Curbs) लागू करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य शाम के पीक आवर्स और सुबह के शुरुआती घंटों में होने वाली बिजली की कमी को दूर करना है।

आवश्यकता का विवरण

KSEB ने अपनी आवश्यकताओं को महीनों के आधार पर विभाजित किया है। अक्टूबर और नवंबर के लिए, बोर्ड 5 शाम से आधी रात तक और आधी रात से सुबह 8:30 बजे तक के समय के लिए 300 MW से 600 MW के बीच बिजली की मांग कर रहा है। दिसंबर के लिए, यह मांग बढ़कर 500 MW से 800 MW तक हो सकती है। इसके अतिरिक्त, बोर्ड अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के प्रत्येक महीने के लिए 300 MW की 'राउंड-द-क्लॉक' (RTC) आपूर्ति की भी योजना बना रहा है।

बिजली की बढ़ती मांग और मानसून में कम उत्पादन के बीच संतुलन बनाना KSEB के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

BozokMedia विश्लेषण

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केरल की ऊर्जा सुरक्षा अब अल्पकालिक खरीद पर अत्यधिक निर्भर हो गई है। हालांकि टेंडर प्रक्रिया से तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए राज्य को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है। नियामक पैनल ने भी पहले ही KSEB को बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में तेजी लाने का सुझाव दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल में बिजली संकट अक्सर मानसून के मौसम में देखा जाता है जब जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric power) कम हो जाता है और मांग बढ़ जाती है। ऐतिहासिक रूप से, राज्य को अन्य राज्यों जैसे ओडिशा से बिजली आयात करनी पड़ती रही है। हाल ही में, KSEB ने मांग को पूरा करने के लिए ओडिशा के GRIDCO से 75 MW और ACB इंडिया लिमिटेड से 15 MW बिजली प्राप्त की थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: KSEB ने निविदा कब जारी की है?
उत्तर: KSEB ने सोमवार, 14 सितंबर को यह निविदा जारी की है।

प्रश्न 2: बिजली की खरीद किस माध्यम से की जाएगी?
उत्तर: बिजली की खरीद केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार DEEP ई-बिडिंग पोर्टल के माध्यम से की जाएगी।

Did You Know?: केरल अपनी बिजली जरूरतों के लिए काफी हद तक जलविद्युत पर निर्भर है, जो मानसून के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है।