केरल मोटर वाहन विभाग दिसंबर 2026 से ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों के लिए एक नया कंप्यूटर-आधारित 'हजार्ड परसेप्शन टेस्ट' शुरू करने जा रहा है। यह टेस्ट सड़क सुरक्षा बढ़ाने और ड्राइवरों की खतरों को पहचानने की क्षमता का आकलन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • दिसंबर 2026 से केरल में नया अनिवार्य कंप्यूटर-आधारित टेस्ट लागू होगा।
  • आवेदकों को लर्नर लाइसेंस मिलने के 30 दिनों के भीतर यह टेस्ट पास करना होगा।
  • टेस्ट पास करने के बाद ही ग्राउंड और रोड टेस्ट में शामिल होने की अनुमति मिलेगी।
  • टेस्ट का प्रारूप वीडियो गेम जैसा होगा जिसमें 10 मिनट के वीडियो शामिल होंगे।

केरल के मोटर वाहन विभाग (MVD) ने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विभाग दिसंबर 2026 से ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए एक अनिवार्य कंप्यूटर-आधारित 'हजार्ड परसेप्शन टेस्ट' (Hazard Perception Test) शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क पर संभावित खतरों को पहले से पहचानने की ड्राइवरों की क्षमता का परीक्षण करना है।

यह नया परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है और इसका प्रारूप काफी हद तक एक वीडियो गेम जैसा होगा। इस प्रक्रिया के तहत, उम्मीदवारों को 10 अलग-अलग एक-एक मिनट के वीडियो दिखाए जाएंगे, जिनमें सड़क पर आने वाली विभिन्न स्थितियों और संभावित खतरों को दर्शाया जाएगा। प्रत्येक वीडियो में कम से कम दो खतरे होंगे, जिन्हें उम्मीदवार को सही समय पर बटन दबाकर पहचानना होगा।

परीक्षा का स्वरूप और अंक प्रणाली

परीक्षण की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त अंक प्रणाली लागू की जाएगी। प्रत्येक सही प्रतिक्रिया के लिए उम्मीदवार को 10 अंक दिए जाएंगे। यदि कोई उम्मीदवार सही समय पर खतरे की पहचान करने में विफल रहता है, तो उसके अंक काट लिए जाएंगे। पास होने के लिए उम्मीदवारों को 100 में से कम से कम 60 अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह टेस्ट लर्नर लाइसेंस प्राप्त करने के केवल 30 दिनों के भीतर पूरा करना आवश्यक है। इस चरण को सफलतापूर्वक पार करने के बाद ही आवेदक को वास्तविक ग्राउंड और रोड ड्राइविंग टेस्ट के लिए पात्र माना जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केरल का यह कदम पूरे भारत के लिए एक मिसाल बन सकता है। सड़क सुरक्षा के प्रति यह सख्त दृष्टिकोण न केवल कुशल ड्राइवरों को सड़क पर उतारेगा, बल्कि भविष्य में होने वाली घातक दुर्घटनाओं में भी कमी लाएगा। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में पहले से ही ऐसे मूल्यांकन का प्रावधान है, लेकिन केरल इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है।

सड़क सुरक्षा केवल कौशल के बारे में नहीं है, बल्कि खतरों को पहले से भांपने की मानसिक सजगता के बारे में भी है।

परिवहन आयुक्त ने निर्देश दिया है कि मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूलों को अगले तीन महीनों के भीतर आवेदकों को इस नए टेस्ट के लिए प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उम्मीदवार तकनीक के साथ सहज हों और परीक्षा के दौरान घबराएं नहीं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में सड़क दुर्घटनाओं की दर वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय रही है। पारंपरिक रूप से, ड्राइविंग टेस्ट केवल वाहन चलाने के कौशल (Steering, Clutch, Brake) पर केंद्रित रहे हैं। हालांकि, आधुनिक यातायात स्थितियों में 'प्रतिक्रिया समय' (Reaction Time) और 'परिस्थितिजन्य जागरूकता' (Situational Awareness) अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जिसे अब इस नए टेस्ट के माध्यम से संबोधित किया जा रहा है।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह टेस्ट सभी राज्यों में अनिवार्य है?
फिलहाल यह केरल में शुरू किया जा रहा है, लेकिन केंद्रीय नियमों में इसका प्रावधान है, जिससे भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसके लागू होने की संभावना है।

2. यदि मैं टेस्ट में फेल हो जाता हूँ तो क्या होगा?
यदि आप 60 अंक प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो आप रोड टेस्ट के लिए पात्र नहीं होंगे और आपको पुन: प्रयास करना होगा।

Did You Know?: हजार्ड परसेप्शन टेस्ट का उद्देश्य यह देखना है कि आप सड़क पर किसी घटना के होने से कितनी देर पहले उसे भांप लेते हैं।