केरल परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए 'हज़ार्ड परसेप्शन टेस्ट' लागू करने का निर्णय लिया है। अब लाइसेंस पाने के लिए उम्मीदवारों को सड़क पर संभावित खतरों को पहचानने की क्षमता का परीक्षण पास करना होगा।

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  • 1 दिसंबर से केरल में नया कंप्यूटर-आधारित 'हज़ार्ड परसेप्शन टेस्ट' लागू होगा।
  • उम्मीदवारों को पास होने के लिए 100 में से कम से कम 60 अंक प्राप्त करने होंगे।
  • यह टेस्ट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ज़मीनी और सड़क परीक्षण से पहले अनिवार्य होगा।

केरल के परिवहन विभाग ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और ड्राइवरों की सतर्कता बढ़ाने के उद्देश्य से ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षा के ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए, राज्य अब 'हज़ार्ड परसेप्शन टेस्ट' (Hazard Perception Test) को अनिवार्य बना रहा है। यह नया कंप्यूटर-आधारित परीक्षण 1 दिसंबर से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

नया परीक्षा पैटर्न और अंक प्रणाली

यह नया परीक्षण पूरी तरह से डिजिटल होगा। इसमें कुल 100 अंकों का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा के दौरान, उम्मीदवारों को एक-एक मिनट के 10 वीडियो क्लिप दिखाए जाएंगे। प्रत्येक क्लिप के लिए 10 अंक निर्धारित हैं। वीडियो में सड़क पर अचानक आने वाली बाधाओं या संभावित खतरों को देखते ही उम्मीदवार को माउस क्लिक करके अपनी प्रतिक्रिया देनी होगी। यदि प्रतिक्रिया सटीक समय पर दी जाती है, तो पूरे अंक मिलेंगे, लेकिन देरी होने पर अंक काटे जाएंगे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 60% अंक प्राप्त करने में विफल रहने वाले उम्मीदवारों को अगले चरणों, जैसे कि ग्राउंड टेस्ट और रोड टेस्ट, में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उम्मीदवार इस नए सिस्टम के लिए तैयार हैं, परिवहन आयुक्त सी. नागരാജु ने ड्राइविंग स्कूलों को अक्टूबर से ही प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं ड्राइवरों की लापरवाही और संभावित खतरों को समय रहते न पहचान पाने के कारण होती हैं। यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में इस तरह के परीक्षणों का सफल कार्यान्वयन देखा गया है। केरल द्वारा इस मॉडल को अपनाना राज्य की सड़क सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि यह केवल ड्राइविंग कौशल ही नहीं, बल्कि मानसिक सतर्कता का भी परीक्षण करता है।

सड़क सुरक्षा केवल वाहन चलाने के बारे में नहीं है, बल्कि संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाने के बारे में है।

ऐतिहासिक रूप से, ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया मुख्य रूप से वाहन नियंत्रण और यातायात नियमों के ज्ञान तक सीमित रही है। हालांकि, बढ़ती दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर किया कि केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं है। यह नया बदलाव ड्राइवरों के 'प्रतिक्रिया समय' (Reaction Time) और 'निर्णय लेने की क्षमता' पर ध्यान केंद्रित करता है।

Did You Know?: हज़ार्ड परसेप्शन टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि क्या ड्राइवर सड़क पर होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को पहचान कर दुर्घटना होने से पहले कदम उठा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह टेस्ट लर्निंग लाइसेंस के बाद होगा?
उत्तर: हाँ, यह टेस्ट लर्निंग लाइसेंस प्राप्त करने के 30 दिनों के बाद आयोजित किया जाएगा।

प्रश्न 2: यदि मैं 60 अंक प्राप्त नहीं कर पाता हूँ तो क्या होगा?
उत्तर: यदि आप 60% अंक प्राप्त नहीं करते हैं, तो आप ग्राउंड और रोड टेस्ट के लिए पात्र नहीं होंगे।