सुप्रीम कोर्ट ने राघवेंद्र तीर्थ द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिससे काशी मठ की संपत्ति की वसूली की प्रक्रिया जारी रहेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राघवेंद्र तीर्थ की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है।
  • केरल हाईकोर्ट का फैसला बरकरार, काशी मठ की संपत्ति की वसूली जारी रहेगी।
  • विवाद मठ के 21वें मठधिपति के उत्तराधिकार और स्वर्ण/चांदी के आभूषणों के स्वामित्व को लेकर है।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें काशी मठ संस्थान की संपत्ति की वसूली के लिए निष्पादन कार्यवाही (execution proceedings) जारी रखने की अनुमति दी गई थी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने राघवेंद्र तीर्थ द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह कानूनी संघर्ष काशी मठ के उत्तराधिकार को लेकर दशकों से चला आ रहा है। विवाद की जड़ पूर्व मठधिपति सुधेंद्र तीर्थ स्वामी और राघवेंद्र तीर्थ के बीच का टकराव है। राघवेंद्र तीर्थ ने तिरुपति जिला अदालत में खुद को 21वें मठधिपति के रूप में घोषित करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। 2009 में, तिरुपति अदालत ने सुधेंद्र तीर्थ के पक्ष में फैसला सुनाया और राघवेंद्र तीर्थ को मठ की सभी मूर्तियों, धार्मिक वस्तुओं और संपत्तियों को वापस करने का आदेश दिया था।

विवाद का मुख्य कारण

मामले में जटिलता तब बढ़ गई जब सुधेंद्र तीर्थ के निधन के बाद, उनके उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी साम्यिंद्र तीर्थ ने खुद को डिक्री-होल्डर (आदेश प्राप्तकर्ता) के रूप में प्रस्तुत किया। साम्यिंद्र तीर्थ का दावा 2003 के एक पंजीकृत वसीयतनामा और 2015 की एक घोषणा पर आधारित है। हालांकि, राघवेंद्र तीर्थ ने इस उत्तराधिकार को चुनौती दी, जिससे कानूनी लड़ाई केरल के एर्नाकुलम कोर्ट तक जा पहुंची।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल संपत्ति के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक संस्थानों के उत्तराधिकार कानूनों और वसीयतनामा की वैधता पर एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करता है। मठ की बहुमूल्य संपत्तियों, जिनमें 234 आभूषण और 27 मूर्तियां शामिल हैं, की बरामदगी अब कानून के माध्यम से सुनिश्चित की जा सकेगी।

धार्मिक संस्थानों में उत्तराधिकार के विवाद अक्सर वसीयत और पारंपरिक प्रथाओं के बीच टकराव का परिणाम होते हैं।

केरल हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में स्पष्ट किया था कि साम्यिंद्र तीर्थ को कार्यवाही जारी रखने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता के पास हस्तक्षेप के लिए कोई ठोस आधार नहीं है।

Did You Know?: काशी मठ एक प्राचीन धार्मिक संस्थान है जिसकी परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इसका प्रबंधन कड़े धार्मिक नियमों के तहत किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्णय दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने राघवेंद्र तीर्थ की याचिका को खारिज कर दिया और केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा जिससे मठ की संपत्ति की वसूली जारी रह सकेगी।

2. विवाद किस संपत्ति को लेकर है?
विवाद मठ के सोने और चांदी के आभूषणों, धार्मिक मूर्तियों और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक सामग्रियों की बरामदगी को लेकर है।