उत्तरी कश्मीर के बारामुला में हो रहे पुरातत्व उत्खनन ने 2,000 साल पुराने बौद्ध स्तूप परिसर के अस्तित्व की पुष्टि की है। यह खोज प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन सांग के मठ या कुषाण राजा जुष्का के खोए हुए शहर के रहस्यों को सुलझा सकती है।
- बारामुला के जेहनपोरा में 2,000 साल पुराने बौद्ध स्तूप परिसर की खोज।
- कुषाण काल (पहली शताब्दी ईस्वी) के अवशेष और पेबल स्टोन की दीवारें मिलीं।
- यह स्थल ह्वेन सांग के मठ या राजा जुष्का के प्राचीन शहर से जुड़ा हो सकता है।
- फ्रांसीसी संग्रहालय में मिली एक पुरानी तस्वीर ने इस खोज को नई दिशा दी।
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के जेहनपोरा गाँव में चल रहा पुरातत्व उत्खनन इतिहास के पन्नों को फिर से लिखने की क्षमता रखता है। विद्वानों और शोधकर्ताओं की एक टीम पिछले एक साल से जेहनपोरा के बौद्ध अवशेषों की खुदाई कर रही है, जहाँ जेह्म नदी के दाहिने तट पर स्थित एक विशाल 2,000 साल पुराना स्तूप परिसर मिला है।
पुरातत्वविदों का मानना है कि यह स्थल न केवल कुषाण काल की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह 7वीं शताब्दी के प्रसिद्ध चीनी बौद्ध विद्वान ह्वेन सांग (Hiuen Tsang) के भूले हुए मठ या कुषाण राजा जुष्का के खोए हुए शहर का प्रमाण भी हो सकता है। खुदाई के दौरान अब तक लगभग छह खाइयाँ खोली गई हैं, जिनमें लगभग 20x20 मीटर का स्तूप आधार पाया गया है।
ऐतिहासिक महत्व और कुषाण संबंध
जेहनपोरा में खुदाई का नेतृत्व कर रहे डॉ. मोहम्मद अजमल शाह ने बताया कि यहाँ मिली दीवारें पेबल स्टोन (कंकड़ पत्थर) से बनी हैं, जो कुषाण काल की वास्तुकला की एक प्रमुख विशेषता है। कुषाणों ने पहली से चौथी शताब्दी ईस्वी के बीच कश्मीर पर 300 से अधिक वर्षों तक शासन किया था और वे मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। यहाँ से प्राप्त मिट्टी के बर्तन और अन्य अवशेष भी इसी काल की पुष्टि करते हैं।
जेहनपोरा का महत्व इसलिए है क्योंकि यह हमें प्राचीन कश्मीर के केवल लिखित संदर्भों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पुरातत्व के माध्यम से क्षेत्र के भौतिक इतिहास को खोजने की अनुमति देता है।
इस खोज को एक नई गति तब मिली जब डॉ. शाह ने पेरिस के गुइमेट संग्रहालय (Guimet Museum) में एक 100 साल पुरानी तस्वीर देखी, जिस पर 'स्तूप ड्यून्स, बारामुल्ला' लिखा था। इस खोज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में इस ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह खोज कश्मीर के सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व को वैश्विक मानचित्र पर फिर से स्थापित करती है। जेहनपोरा प्राचीन झेलम घाटी मार्ग पर स्थित था, जो गांधार और मध्य एशिया को कश्मीर से जोड़ने वाला एक प्रमुख प्रवेश द्वार था। यह स्थल प्राचीन बौद्ध सांस्कृतिक और संचार नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा होगा।
7वीं शताब्दी में, चीनी यात्री ह्वेन सांग ने अपने यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' में एक 'पत्थर के द्वार' का उल्लेख किया था जो कश्मीर के प्रवेश द्वार का प्रतीक था। जेहनपोरा की भौगोलिक स्थिति ह्वेन सांग के वर्णनों से मेल खाती है, जो इसे ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
Frequently Asked Questions
1. जेहनपोरा में क्या खोजा गया है?
जेहनपोरा में 2,000 साल पुराने बौद्ध स्तूप परिसर के अवशेष मिले हैं, जो कुषाण काल से संबंधित हैं।
2. इस खोज में ह्वेन सांग का क्या संबंध है?
शोधकर्ता यह जांच रहे हैं कि क्या यह स्थल ह्वेन सांग द्वारा वर्णित प्राचीन मठ या उनके यात्रा मार्ग का हिस्सा था।