मुजफ्फरपुर के घोसौत गांव में 65 वर्षीय दुर्गा सहनी के निधन के बाद, उनके तीन बेटियों ने पारंपरिक पुरुष‑संबंधी रिवाज़ को तोड़ते हुए पिता की अर्थी कंधे पर उठाई और सबसे छोटी बेटी ने मुखाग्नि दी। यह घटना गाँव में विरोध के बावजूद अधिकार और सम्मान की नई मिसाल बन गई है।

मुख्य बिंदु

  • तीन बेटियों ने पिता की अर्थी कंधे पर उठाई
  • सबसे छोटी बेटी ने मुखाग्नि दी
  • स्थानीय विरोध के बावजूद कानूनी अधिकार का प्रयोग किया

मुजफ्फरपुर जिले के घोसौत गांव में 65 वर्षीय दुर्गा सहनी का निधन हुआ। उनके पास कोई पुत्र नहीं, केवल तीन बेटियाँ थीं। पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं के बावजूद, उन्होंने पिता के अंतिम संस्कार में पुरुष‑संबंधी भूमिका निभाने का निर्णय किया।

तीनों बहनों ने अपने नाती के साथ मिलकर पिता की अर्थी को कंधे पर उठाया और गाँव की गलियों से श्मशान तक ले गईं। इस दृश्य को देखते हुए कुछ स्थानीय पट्टीदारों ने विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि बेटी नहीं दे सकतीं मुखाग्नि।

गांव के मुखिया अखिलेश राम ने तुरंत हस्तक्षेप किया, यह स्पष्ट करते हुए कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने माता‑पिता के अंतिम संस्कार का अधिकार देता है, चाहे वह बेटा हो या बेटी। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर पुलिस को बुलाने की भी चेतावनी दी, जिससे विरोधियों ने अपना विरोध बंद किया।

श्मशान पर पहुंचते ही सबसे छोटी बेटी, पिंकी देवी, आँसुओं से भरी आँखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस क्षण ने कई सालों की जेंडर‑आधारित धारणाओं को ध्वस्त कर दिया, और पूरे गांव में भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में पारंपरिक रूप से अंतिम संस्कार पुरुषों द्वारा किया जाता रहा है, जबकि महिलाओं को अक्सर इस कार्य से बाहर रखा जाता था। हाल के दशकों में कई राज्य विधानों ने इस असमानता को खत्म करने के लिए परिवर्तन किए हैं, पर स्थानीय सामाजिक मान्यताएँ अभी भी गहरी जड़ें रखती हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such grassroots challenges to gendered rituals accelerate legal reforms and shift public perception, paving the way for more inclusive practices across rural India.

"परिवारिक जिम्मेदारी में जेंडर का कोई स्थान नहीं होना चाहिए," सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
क्या आप जानते हैं?: भारत में 2020 के बाद से 12 राज्य ने आधिकारिक रूप से महिलाओं को अंतिम संस्कार करने का अधिकार मान्यता दी है।

Frequently Asked Questions

  • क्या बेटियों को कानूनी रूप से मुखाग्नि देने का अधिकार है? हाँ, भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने अभिभावकों के अंतिम संस्कार का समान अधिकार देता है।
  • क्या इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कोई नीति परिवर्तन किया? अभी तक कोई आधिकारिक नीति परिवर्तन नहीं हुआ, पर यह सामाजिक चेतना में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।