अभिनेत्री पद्मप्रिया जनकीरामन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक मार्मिक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने समाज में महिलाओं के संघर्ष और वास्तविक स्वतंत्रता की कमी पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

  • भारतीय समाज में महिलाओं के लिए 'स्वतंत्रता' का अर्थ अभी भी सीमित है।
  • STEM और उच्च पदों पर महिलाओं की भागीदारी अभी भी चिंताजनक रूप से कम है।
  • महिलाओं की 'सहनशक्ति' को उनकी मजबूती माना जाता है, जबकि यह उनकी मजबूरी बन गई है।

15 अगस्त 1947 को, जवाहरलाल नेहरू ने देश को गरिमा और अवसर का वादा किया था। लेकिन 79 वर्षों के बाद, यह सवाल पूछना प्रासंगिक है कि भारतीय महिलाओं को उस वादे का कितना हिस्सा मिला है? प्रसिद्ध अभिनेत्री और लेखिका पद्मप्रिया जनकीरामन ने अपनी बेटी के संदर्भ में इस पर गहरा चिंतन किया है।

लेखिका का तर्क है कि भारतीय घरों में लड़कियों को जन्म से ही 'बनाया' जाता है—उन्हें सही ढंग से बैठने, जोर से न हंसने और हर कदम पर अनुमति लेने की शिक्षा दी जाती है। यह सामाजिक ढांचा उनकी स्वतंत्रता को जन्म से ही सीमित कर देता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सांख्यिकीय है। भारत में दुनिया में महिला STEM स्नातकों का उच्चतम हिस्सा है, फिर भी केवल 27 प्रतिशत ही कार्यबल में शामिल हो पाती हैं। मनोरंजन उद्योग से लेकर पत्रकारिता और कानून तक, नेतृत्व के पदों पर महिलाओं की उपस्थिति नगण्य है।

हमें इस बात से कम प्रभावित होना चाहिए कि महिलाएं कितनी अच्छी तरह सहती हैं, और इस बात पर अधिक जिज्ञासु होना चाहिए कि सहना उनकी नौकरी की आवश्यकता क्यों बनी हुई है।

केरल में हेमा कमेटी की रिपोर्ट और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों में उठते सवाल इस बात का प्रमाण हैं कि महिलाओं के लिए 'कमरे में प्रवेश करना' और 'कमरे को चलाना' दो अलग बातें हैं। जब एक महिला शीर्ष पर पहुँचती है, तो उसके सामने एक और 'ग्लास सीलिंग' होती है।

तुलनात्मक डेटा: महिला भागीदारी

क्षेत्रमहिलाओं की भागीदारी (%)
STEM कार्यबल27%
केंद्रीय विश्वविद्यालय (शिक्षण)<30%
वरिष्ठ अधिवक्ता3.4%
समाचार पत्र संपादक/मालिक13%

अंततः, लेखिका एक ऐसी दुनिया की कल्पना करती हैं जहाँ स्वतंत्रता का अर्थ होगा—बिना किसी उपदेश के देर रात घर लौटना, बिना वेतन वाले काम को सम्मान मिलना, और पहली बार में ही महिलाओं की बात पर विश्वास किया जाना।

क्या आप जानते हैं?: भारत में महिला STEM स्नातकों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है, लेकिन वर्कफोर्स में उनकी भागीदारी वैश्विक औसत से काफी कम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. लेखिका का मुख्य संदेश क्या है?
लेखिका का संदेश है कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि समाज में बिना किसी भेदभाव और पूर्वाग्रह के गरिमा के साथ जीने के बारे में है।

2. 'सहनशक्ति' (Resilience) पर लेखिका की क्या राय है?
वह मानती हैं कि महिलाओं की सहनशीलता को उनकी प्रशंसा के बजाय एक व्यवस्थागत विफलता के रूप में देखा जाना चाहिए जो उन्हें संघर्ष करने के लिए मजबूर करती है।