तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सांबा फसल की खेती के लिए मेट्टूर बांध के स्लुइस गेट खोल दिए हैं। हालांकि, सरकार द्वारा पानी की रिहाई को केवल 45 दिनों तक सीमित रखने के फैसले से किसानों में चिंता है।
- मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कम भंडारण के कारण 80 दिनों की देरी के बाद मेट्टूर बांध के गेट खोले।
- पानी की रिहाई शुरू में केवल 45 दिनों (15 अक्टूबर तक) के लिए निर्धारित है।
- जलाशय वर्तमान में 91.56 फीट पर है, जो इसकी कुल क्षमता का लगभग आधा है।
- तमिलनाडु के 12 जिलों में लगभग 16.05 लाख एकड़ भूमि को इस पानी से लाभ होगा।
मंगलवार को एक औपचारिक समारोह में, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मेट्टूर के स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोलकर कावेरी जल को डेल्टा की ओर प्रवाहित किया। पीढ़ियों से किसानों के लिए यह वार्षिक घटना कृषि सीजन की शुरुआत का संकेत होती है। शुरुआत में 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसे मंगलवार शाम तक बढ़ाकर 7,000 क्यूसेक करने की योजना है।
हालांकि, इस बार की स्थिति सामान्य नहीं है। सरकार ने पानी की रिहाई की योजना केवल 45 दिनों के लिए बनाई है, जो 15 अक्टूबर तक चलेगी। यह निर्णय उपलब्ध जल स्तर और सिंचाई की आवश्यकताओं के आधार पर लिया गया है। जलाशय का स्तर वर्तमान में 91.56 फीट है, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 120 फीट है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि रिहाई की यह सीमित 45-दिवसीय अवधि सांबा फसल के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा करती है। चूंकि तंजावुर और तिरुचि सहित 12 जिलों की सामाजिक-आर्थिक स्थिरता पूरी तरह से इस जल प्रवाह पर निर्भर है, इसलिए समय से पहले गेट बंद होने पर व्यापक फसल विफलता हो सकती है, जिससे राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
मेट्टूर के खुलने में देरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कैसे जलवायु परिवर्तन और अंतर-राज्यीय जल विवाद दक्षिण भारत की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।
संसाधनों के कुशल प्रबंधन के लिए, सरकार ने जल संसाधन, राजस्व और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीमें तैनात की हैं ताकि अवैध पंपिंग और अनधिकृत जल निष्कर्षण को रोका जा सके। किसानों को कम अवधि वाली धान की किस्मों और 'डायरेक्ट सीडिंग' जैसी जल-बचत तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1934 में बनकर तैयार हुआ मेट्टूर बांध इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है, जिसे बनाने में 17,000 मजदूरों ने काम किया था। यह केवल सिंचाई का साधन नहीं है, बल्कि जलविद्युत उत्पादन का भी एक प्रमुख केंद्र है। यह बांध कर्नाटक के काबिनी और कृष्ण राजा सागर जलाशयों से आने वाले पानी पर निर्भर है, जो इसे कावेरी जल विवाद का केंद्र बनाता है।
| विशेषता | सामान्य वर्ष | वर्तमान वर्ष (2026) |
|---|---|---|
| खुलने की तिथि | 12 जून | 1 सितंबर |
| सिंचाई की अवधि | 230 दिन | नियोजित 45 दिन |
| जलाशय का स्तर | 120 फीट के करीब | 91.56 फीट |
इस घटनाक्रम के पीछे गहरी राजनीतिक हलचल भी है। मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में कावेरी विवाद और कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु संतुलित जलाशय के मुद्दे पर कर्नाटक सरकार के साथ सीधे राजनीतिक संवाद की कोशिश की थी। हालांकि ये बातचीत सफल नहीं हुई, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के तहत अपने पानी के हिस्से को सुरक्षित करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस साल मेट्टूर बांध को खोलने में देरी क्यों हुई?
दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण जलाशय में पानी का भंडारण कम था, जिससे देरी हुई।
प्रश्न 2: कावेरी जल की रिहाई से किन जिलों को लाभ होगा?
तिरुचि, तंजावुर, तिरुवरुर और ईरोड सहित कुल 12 जिलों के लगभग 16.05 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।