जंतर-मंतर में सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन के दसवें दिन, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कचौड़ी‑नूडल्स खाता वीडियो वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर उठे सवालों के जवाब में दीपके ने वीडियो के संदर्भ को बदलकर प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए अपनी सफाई दी।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10वें दिन सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल देश भर में तीव्र चर्चा का केंद्र बन गया। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक वीडियो, जिसमें वह कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा और नूडल्स खाते दिख रहे थे, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई नेटिज़नों ने सवाल उठाया कि जब वांगचुक अनशन पर हैं, तो दीपके और उनके सहयोगी क्यों नहीं भूख हड़ताल में शामिल हुए।
वीडियो पर उठी तीखी आलोचना
वीडियो को देख कर कई उपयोगकर्ताओं ने इसे "भूख हड़ताल के विरोध" के रूप में चित्रित किया और दीपके को आंदोलन से हटाने की कोशिश का आरोप लगाया। टिप्पणीकारों ने यह भी कहा कि इस तरह की सामग्री अनशन के मूल मुद्दे—NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग—से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
दीपके ने दी विस्तृत सफाई
इंडिया टुडे डिजिटल के सहयोगी प्लेटफ़ॉर्म दिल्ली तक के साथ विशेष बातचीत में दीपके ने कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। उन्होंने बताया कि वह क्लिप उस समय की है जब सोनम वांगचुक यूरोप में एक पर्यावरणीय सम्मेलन में भाग ले रही थीं, न कि अनशन के दौरान। दीपके ने कहा कि क्लिप को जानबूझकर काट‑छाँट कर शेयर किया गया था ताकि छात्र आंदोलन को कमजोर किया जा सके।
वांगचुक का अनशन और उसकी माँगें
वांगचुक का अनशन मुख्यतः NEET परीक्षा में पेपर लीक, युवा बेरोजगारी और शिक्षा मंत्रालय की नीतियों के खिलाफ है। आंदोलन का लक्ष्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुरक्षा में सुधार है। इस कारण जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों ने समर्थन में भाग लिया, जबकि वांगचुक ने अकेले भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्यों पूरी कोर टीम नहीं बैठी। दीपके ने इस पर कूटनीतिक रणनीति का हवाला देते हुए कहा कि यदि सभी सदस्य भूख हड़ताल पर बैठेंगे तो प्रदर्शन का प्रबंधन कठिन हो जाएगा।
भविष्य की संभावनाएँ और प्रभाव
दीपके ने बताया कि उन्हें माइग्रेन की गंभीर समस्या है, जिससे लगातार उपवास रखना मुश्किल है। साथ ही, उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में उनका वजन लगभग 5 किलोग्राम घट चुका है। वांगचुक ने अनशन को तब तक जारी रखने का इरादा जताया है जब तक उनकी माँगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस बीच, केंद्र सरकार से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे आंदोलन की अवधि अनिश्चित बनी हुई है।