पंजाब कांग्रेस के भीतर शक्ति संघर्ष के बीच पार्टी के राष्ट्रीय उच्च नेतृत्व ने नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अमरिंदर सिंह राजावरिंग राष्ट्रपति बने रहेंगे और संवाद के माध्यम से मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
पंजाब कांग्रेस में चल रहे शक्ति संघर्ष के बीच राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस उच्च कमांड ने तय किया है कि पार्टी के राज्य नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। राज्य इन-चार्ज भूपेश बघेल ने बुधवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमरिंदर सिंह राजावरिंग पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुद्दों को संवाद के जरिए सुलझाने की कोशिश की है।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
पंजाब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में कई चुनौतियों का सामना किया है। पिछले कुछ महीनों में पार्टी के भीतर नेतृत्व पर बंटवारा हुआ, जहाँ चारणजीत सिंह चन्नी, जो वर्तमान में कांग्रेस सांसद हैं, ने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर उच्च नेतृत्व से मुलाकात की मांग की। इस दौर में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 1 जुलाई को पंजाब इकाई का पुनर्गठन किया, जिसमें राजावरिंग को अध्यक्ष और चन्नी को अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया।
भूपेश बघेल का संदेश
भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “जब पार्टी का उच्च कमांड कोई फैसला लेता है, तो उसे बदला नहीं जाता।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि लगातार नेतृत्व बदलना “बच्चों का खेल नहीं” है। बघेल ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर चल रहे विवादों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाएगा और किसी भी प्रकार का अचानक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
संकट के प्रमुख स्तम्भ
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने चन्नी से मुलाकात कर यह बताया कि वरिष्ठ नेताओं ने “सच्ची कोशिशें” की हैं, जिससे मुद्दों को संवाद के ज़रिए हल किया जा सके। उन्होंने अपने X (Twitter) पोस्ट में लिखा, “पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजावरिंग, राज्य इन-चार्ज भूपेश बघेल और अन्य वरिष्ठ नेता संवाद द्वारा एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहे हैं।” यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि पार्टी का मुख्य फोकस चुनावी तैयारी और संगठनात्मक मजबूती पर है।
आगे का रास्ता
भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस भवन में एक व्यापक बैठक बुलाकर, बूथ स्तर से लेकर कार्यकर्ता समन्वय तक के मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज़ किया जा रहा है, और पार्टी को “एकजुटता और मजबूती” के साथ मैदान में उतरना है। यदि पार्टी के भीतर यह संवाद जारी रहता है, तो संभावित फटकारों को कम करके, कांग्रेस अपने वोट बैंक को पुनः सुदृढ़ कर सकती है।