दिल्ली के 14 जेलों में 19,500 कैदी रह रहे हैं, जो अनुमत क्षमता से लगभग दो गुना अधिक है। इस ओवरक्राउड को घटाने के लिए सरकार ने 48 शहरी गाँवों में उपलब्ध जमीन की पहचान करने का सर्वे शुरू किया है।
दिल्ली के जेल परिसरों पर जनसंख्या का बोझ दिन‑प्रतिदिन बढ़ रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में 14 जेलों की कुल क्षमता 10,026 है, जबकि वर्तमान में 19,500 कैदी रखे जा रहे हैं – यानी 194.6% अधिभोग। इस अत्यधिक भीड़भाड़ ने जल, सीवेज, स्वास्थ्य और पुनर्वास सुविधाओं पर गंभीर दबाव डाला है।
शहरी गाँवों को ‘अर्बन’ घोषित करने की पृष्ठभूमि
मई 2025 में दिल्ली महानगर निगम (DMC) की स्थायी समिति ने अंतिम 48 गांवों को ‘शहरी गाँव’ की श्रेणी में बदल दिया। इस परिवर्तन के साथ दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम, 1954 (DLR Act) के कृषि भूमि‑उपयोग नियमों का प्रभाव समाप्त हो गया और इन क्षेत्रों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधीन कर दिया गया। परिणामस्वरूप, भूमि मालिक अब आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक विकास के लिए अपनी जमीन बेच या उपयोग कर सकते हैं।
जेल विस्तार के लिए विशेष सर्वेक्षण
जेल निदेशक (प्रिज़न्स) के कार्यालय ने पाँच समितियों का गठन किया, प्रत्येक में चार सदस्य हैं। इन समितियों को चार प्रमुख कार्य सौंपे गए हैं: (1) उपलब्ध भूमि का सर्वेक्षण, (2) तिहाड़, रोहिनी और मंडोली जैसे मौजूदा जेलों के विस्तार या पुनर्स्थापन के लिए उपयुक्त भूखंडों की पहचान, (3) संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर भूमि‑संबंधी डेटा की पुष्टि, तथा (4) समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और सिफ़ारिशें प्रस्तुत करना।
रहस्योद्घाटन के पीछे की सरकारी योजना
2025‑26 के बजट में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने तिहाड़ जेल को राजधानी के बाहर स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। अप्रैल 2025 में, दिल्ली जेल विभाग ने DDA को 400 एकड़ जमीन आवंटित करने का अनुरोध किया, जिससे नया जेल कॉम्प्लेक्स बनाया जा सके। यह कदम न केवल भीड़भाड़ को कम करेगा, बल्कि प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और पुनर्वास कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने में भी मदद करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ
शहरी गाँवों में जमीन की उपलब्धता सरकार के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है, परन्तु स्थानीय विरोध, भूमि मूल्य वृद्धि और पर्यावरणीय चिंताएँ नई चुनौतियाँ बन सकती हैं। यदि सही नियोजन और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई, तो यह पहल दिल्ली के जेल प्रणाली को विश्व स्तर पर अधिक मानवीय और प्रबंधनीय बना सकती है।