दिल्ली के मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता ने गैर‑रिश्तेदारों के लिये जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के माध्यम से संपत्ति लेन‑देन पर नई जांच प्रक्रिया लागू की। यह कदम स्टाम्प ड्यूटी में चोरी को रोकने और भूमि माफिया को काबू में लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को एक निर्देश जारी किया जिसमें जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के माध्यम से संपत्ति लेन‑देन पर कड़ी जाँच का प्रावधान किया गया है। यह पहल राज्य की राजस्व हानि को रोकने, भूमि माफिया के प्रभाव को घटाने और सब‑रजिस्ट्रार कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने के लक्ष्य से शुरू की गई है।

पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में कई मामलों में GPA दस्तावेज़ को मात्र नाम बदल कर रजिस्टर किया गया, जबकि वास्तविक लेन‑देन में बिक्री, उपहार या गिरवी जैसी शर्तें सम्मिलित थीं। इस कारण स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान टाल दिया जाता था, जिससे सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।

नए निर्देश

नए आदेश के तहत, यदि GPA दस्तावेज़ रक्त संबंधियों (माता‑पिता, पति‑पत्नी, बच्चे, भाई‑बहन) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में हो, तो उसे सीधे सब‑रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्टर नहीं किया जाएगा। इसके बजाय दस्तावेज़ को स्टाम्प ड्यूटी कलेक्टर को भेजा जाएगा, जो 30 दिनों के भीतर यह तय करेगा कि यह केवल GPA है या इसे पूर्ण स्टाम्प ड्यूटी के साथ कॉन्वेयन्स डीड/सेल डीड के रूप में मानना चाहिए।

प्रभाव और चुनौतियां

यह नियम न केवल स्टाम्प ड्यूटी में चोरी को रोकता है, बल्कि अनियमित भूमि लेन‑देन को भी रोकता है। सब‑रजिस्ट्रार को अब प्रत्येक दस्तावेज़ की विस्तृत जाँच करनी होगी—जैसे कि क्या उसमें वित्तीय विचार, कब्जा हस्तांतरण, या स्थायी बिक्री अधिकार शामिल हैं। इस प्रक्रिया के लिए एक अलग रजिस्टर बनाएगा और मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

भविष्य की निगरानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले महीने तक एक ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे सभी GPA‑आधारित लेन‑देन की वास्तविक स्थिति रीयल‑टाइम में देखी जा सकेगी। साथ ही, जो सब‑रजिस्ट्रार अनधिकृत GPA रजिस्टर करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली ठीक से लागू हो, तो दिल्ली में राजस्व वृद्धि और भूमि माफिया पर नियंत्रण दोनों संभव होंगे।