ऑस्ट्रेलिया में अब भारतीय प्रवासी सबसे बड़ी विदेशी‑जन्मी समुदाय बन चुके हैं। यह जनसांख्यिकीय बदलाव देश की राष्ट्रीय पहचान को पुनः परिभाषित कर रहा है और भारत‑ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी में नई चुनौतियों व अवसरों को जन्म दे रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासी अब आधिकारिक तौर पर सबसे बड़ी विदेश‑जन्मी समूह बन चुके हैं, जो पहले इंग्लैंड‑जन्मी जनसंख्या को पीछे छोड़ चुका है। दो सदी तक ब्रिटिश‑उत्पन्न बहुसंख्यक ने देश की पहचान को आकार दिया था; अब भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती संख्या एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाती है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा, जो उनका तीसरा दौरा है, को इस परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
संबंधों का विकास: ‘तीन सी’ से ‘चार डी’ तक
पिछले दशकों में भारत‑ऑस्ट्रेलिया संबंध केवल क्रिकेट, करी और कॉमनवेल्थ (तीन सी) तक सीमित थे। अब इन्हें लोकतंत्र, रक्षा, प्रवासियों और दोस्ती (चार डी) के रूप में पुनः परिभाषित किया गया है। क्वाड (भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान) जैसे सुरक्षा गठबंधन और द्विपक्षीय व्यापार समझौते इस बदलाव के ठोस उदाहरण हैं। मोदी के दौरे में इन चार स्तम्भों को उजागर किया जाएगा, परंतु सबसे अधिक ध्यान ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ नामक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम पर होगा, जहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय को प्रमुख मंच मिलेगा।
नया प्रवासन युग और उसका स्वरूप
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों का इतिहास अपेक्षाकृत नया है। 1960‑70 के दशक में व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पॉलिसी के हटने के बाद ही पहली बड़ी लहर आई। इस जनसमूह का अधिकांश हिस्सा 2014 के बाद, ‘न्यू इंडिया’ के दौर में, आर्थिक अवसरों और घरेलू लोकतांत्रिक चुनौतियों के कारण आया है। इस पीढ़ी का भारत से मजबूत सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय संबंध है, जिससे उनका सामाजिक प्रभाव सिर्फ संख्याओं से कहीं अधिक है।
राजनीतिक प्रतिकूलता और सार्वजनिक विमर्श
विश्वभर में प्रवासन विरोधी लहरें तेज हो रही हैं, और ऑस्ट्रेलिया में यह प्रवाह भारतीय समुदाय को लक्ष्य बना रहा है। ‘मार्च फ़ॉर ऑस्ट्रेलिया’ जैसी राष्ट्रवादी रैलियों और दाहिनी‑पक्षीय ‘वन नेशन’ पार्टी की बढ़ती ताकत इस तनाव को और गहरा कर रही है। मोदी का हाई‑प्रोफ़ाइल प्रवासी कार्यक्रम इन विरोधी आवाज़ों के बीच एक संदेश देगा – भारतीय समुदाय न केवल बड़ी है, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से देश के भविष्य का अभिन्न हिस्सा है।
भविष्य की दिशा: नीति‑निर्माण में नई मांग
भारतीय प्रवासियों को केवल राजनैतिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक सक्रिय मतदाता वर्ग माना जाना चाहिए। दोनों देशों को प्रवासियों के वास्तविक जीवन, सामाजिक सहभागिता और विश्वास‑निर्माण पर आधारित ठोस डेटा एकत्र करना आवश्यक है। यह न केवल द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की बहुसांस्कृतिक पहचान को भी स्थायी रूप से बदल देगा। लोकतंत्र, रक्षा, प्रवासी और दोस्ती को चार स्तम्भ बनाये रखने के लिए, इस समुदाय को समझना और उनकी आवाज़ को नीति‑निर्माण में शामिल करना अनिवार्य है।