थाने के शासत्री अस्पताल में नवजात शिशु के स्थानांतरण की सलाह पर दो डॉक्टरों पर हमला किया गया। घटना के बाद पुलिस ने शिवसेना कॉरपोरेटर रमेेश सुक्रिया माथरे और पाँच सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
महाराष्ट्र के थाने जिले के शासत्री नगर अस्पताल में सोमवार शाम को एक हिंसक घटना घटी, जिसमें दो डॉक्टरों और अस्पताल के कुछ कर्मचारियों पर शारीरिक हमला किया गया। यह हमला तब हुआ जब नवजात शिशु के परिवार को नियोनैटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में जगह न मिलने के कारण बच्चे को किसी अन्य सुविधा में स्थानांतरित करने की सलाह दी गई थी।
पृष्ठभूमि और घटना का विवरण
डॉक्टर सृष्टि बविस्कर और वैभव सालुंके ने परिवार को बताया कि वर्तमान में अस्पताल के NICU में कोई खाली बेड नहीं है, इसलिए बच्चे को निकटवर्ती किसी बड़े अस्पताल में ले जाना आवश्यक है। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर परिवार ने शिवसेना के कॉरपोरेटर रमेेश सुक्रिया माथरे को संपर्क किया, जो तुरंत अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों को verbally abuse और शारीरिक रूप से मारने लगा। डॉक्टर सालुंके को चोटें आईं, जबकि अन्य कर्मचारियों को भी धक्का दिया गया।
राजनीतिक प्रतिध्वनि
घटना के बाद भारतीय मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने तेज़ी से प्रतिक्रिया दी और यदि तुरंत FIR नहीं दर्ज की गई तो क्षेत्र के सभी निजी क्लिनिक और अस्पताल बंद करने की धमकी दी। इस दबाव के चलते स्थानीय पुलिस ने मंगलवार रात को माथरे और उनके चार पुरुष सहयोगियों तथा एक महिला के खिलाफ कई भारतीय न्याय संहिता (B.N.S) की धारा में मामला दर्ज किया। इस बीच शिवसेना (UBT) के सांसद और स्वास्थ्य मंत्री श्रीकांत शिंदे ने हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल समुदाय की प्रतिक्रिया
IMA के कालयन‑डोंबिवली यूनिट के प्रतिनिधियों ने KDMC के आयुक्त अभिनव गोयल से मुलाकात की और तुरंत आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। अस्पताल के कर्मचारियों ने मंगलवार को काम बंद करने का प्रोटेस्ट किया, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न हुआ। इस दौरान शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे ने X (ट्विटर) पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से सवाल किया कि क्या वह इस ‘गुंडागिरी’ को बर्दाश्त करेंगे।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की स्थिति
पुलिस ने बताया कि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, पर मामले की पूरी जांच चल रही है। आरोपी पर सार्वजनिक सेवाकार्य में कर्तव्यनिष्ठा के विरुद्ध, चोट पहुँचाने, आपराधिक डरावनी, अनुचित अपमान, अवैध सभा और दंगे की धारा में आरोप लगे हैं। इस मामले ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा, राजनीतिक दुरुपयोग और सार्वजनिक अधिकारों के बीच जटिल संबंधों को उजागर किया है।