केलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी के तीन फ्रीजेड खातों को सीमित रूप से चलाने की अनुमति दी, परन्तु बगावती विधायक ऋताब्रता बनर्जी ने इन निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन दायर करने का इरादा जताया। उन्होंने पार्टी के फंड से 160 करोड़ रुपये की हवाई जहाज़ और हेलिकॉप्टर खरीद को धनशोधन का आरोप लगाया।
केलकत्ता उच्च न्यायालय ने 30 सितम्बर 2026 तक त्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन फ्रीजेड बैंक खातों को केवल नियमित पार्टी खर्च और कानूनी लागतों के लिये सीमित रूप से उपयोग करने की अनुमति दी। इस आदेश के बाद, बगावती विधायक ऋताब्रता बनर्जी ने घोषणा की कि उनका समूह इस निर्णय को चुनौती देने के लिये सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) दायर करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में नई चुनौती
बनर्जी ने बताया कि उनके कानूनी टीम ने पहले ही इस मामले की रणनीति तैयार कर ली है और जल्द ही एक औपचारिक याचिका दायर की जाएगी। वह इस बात पर बल दे रहे हैं कि जब केस को कोलकाता हाई कोर्ट में दायर किया गया था, तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) को शामिल नहीं किया गया था, परन्तु अब SLP दाखिल करने से ED को भी प्रक्रिया में जुड़ना पड़ेगा।
धनशोधन के गंभीर आरोप
विधायक ने फिर से आरोप लगाए कि टीएमसी ने अपने फंड का उपयोग करके एक एम्ब्रेयर लेगेसी 600 एयरक्राफ्ट और अगुस्ता हेलिकॉप्टर खरीदा, जिसे बाद में वही पार्टी किराए पर ले रही है। उन्होंने इसे "नवीन नटवारल" कहा, जहाँ पार्टी के 160 करोड़ रुपये का उपयोग करके संपत्ति खरीदी गई और फिर उसी कंपनी को किराया दिया गया, जिससे धनशोधन का सिद्धांत स्पष्ट हो जाता है।
विदेशी लेनदेन और कयमन द्वीप
ऋताब्रता ने बताया कि फंड को कोलकाता से कयमन द्वीप तक भेजा गया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय धन शोधन की आशंका बढ़ती है। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली जाकर प्रवर्तन निदेशालय को लिखित शिकायत करेंगे, ताकि इस मामले की गहन जांच हो सके।
टीएमसी का खंडन और आगे की सुनवाई
टीएमसी ने सभी आरोपों को अस्वीकार किया, यह कहा कि जांच राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है और पार्टी ने अपने वित्तीय विवरण चुनाव आयोग और आयकर विभाग को पूरी तरह प्रस्तुत कर दिए हैं। अदालत ने एक रिटायर्ड जज, जस्टिस सुब्रत तालुकार, को विशेष अधिकारी नियुक्त कर सभी निकासी की निगरानी करने का आदेश दिया है। अगले सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है, जिसमें जांच एजेंसियों को अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।