विषाखपट्टनम के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक, न्यूनतम वेतन ₹26,000 की मांग और नव चेतना ऐप को समाप्त करने के उद्देश्य से, जगदंबा जंक्शन से कलेक्टरेट तक सैकड़ों की टोल में मार्च किए। उन्होंने दो साल पहले विपक्षी नेता द्वारा दी गई वेतन वृद्धि की प्रतिज्ञा को न निभाने का आरोप लगाया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विषाखपट्टनम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन ₹26,000 की मांग की।
- नव चेतना मोबाइल एप्लिकेशन को हटाने की भी मांग उठाई गई।
- राज्य और केंद्र दोनों ने पिछले सात वर्षों में वेतन नहीं बढ़ाया, जबकि महंगाई बढ़ी।
विषाखपट्टनम—जुलाई 10, 2026—आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक, काली साड़ी में सजे और लाल CITU झंडे लिए, जगदंबा जंक्शन से कलेक्टर कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। सैकड़ों महिलाओं ने टैबर्ड‑स्टाइल के पटल पर ‘₹26,000 न्यूनतम वेतन’, ‘नव चेतना ऐप बंद’ जैसे नारे लगाए, जिससे शहर के प्रमुख राजमार्गों पर गूँज उठी।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
आंगनवाड़ी केंद्र, 1975 में स्थापित, भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण का आधारस्तंभ माना जाता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता—मुख्यतः महिलाएँ—बच्चों के पोषण, प्रसवपूर्व देखभाल और मातृस्वास्थ्य की देखरेख करती हैं। हालांकि, उनका वेतन 2016 में तय न्यूनतम वेतन ₹7,000 पर ही स्थिर रह गया, जबकि महंगाई और कार्यभार में निरन्तर वृद्धि हुई। 2024 में राज्य सरकार ने चुनावी प्रतिज्ञा के तहत वेतन वृद्धि का वादा किया, परन्तु दो साल बाद भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
प्रदर्शन के मुख्य बिंदु
रैली का मार्ग जगदंबा जंक्शन से घड़ी टॉवर, किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (KGH) तक गया, जहाँ विभिन्न जिलों के कार्यकर्ता एकत्रित हुए। CITU जिला अध्यक्ष आर.के.एस.वी. कुमार ने कहा, “सरकार ने बड़ी कंपनियों को हजारों करोड़ की रियायतें दीं, पर हमारे कार्यकर्ताओं के वेतन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले प्रशासन के दौरान 42‑दिन की हड़ताल के बाद सरकार ने वेतन वृद्धि का वादा किया था, पर वह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ।
राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभाव
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मुख्यतः राज्य‑स्तरीय सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं; उनका असंतोष नीतिगत कार्यान्वयन को बाधित कर सकता है। इसके अलावा, नव चेतना जैसे डिजिटल एप्लिकेशन का अनिवार्य उपयोग, बिना उचित प्रशिक्षण या वेतन वृद्धि के, कार्यभार को और बढ़ा रहा है। यदि सरकार इस मुद्दे को शीघ्र नहीं सुलझाती, तो यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
आगे की दिशा
कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर की अनुपस्थिति के कारण, कार्यकर्ताओं ने जिला राजस्व अधिकारी विस्वेसर नायडू को याचिका सौंप दी। CITU ने घोषणा की कि वेतन संशोधन की घोषणा तक आंदोलन जारी रहेगा, और हर चरण में कार्यकर्ताओं को समर्थन देंगे।