पुणे में विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) प्रक्रिया के दौरान दो अलग‑अलग भाषा‑सूची में दस्तावेज़ों का अंतर मतदाता पंजीकरण में भ्रम पैदा कर रहा है। प्रमुख अधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता दोनों ही इस असंगति को सुधारने की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • माराठी और अंग्रेज़ी सूची में दस्तावेज़ों का अंतर मतदाता पंजीकरण में बाधा बन रहा है।
  • राशन कार्ड व बैंक पासबुक को ईसीआई की आधिकारिक सूची में नहीं माना गया है।
  • डिप्टी कलेक्टर का कहना है कि अतिरिक्त दस्तावेज़ों को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।

पुणे में विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के तहत चुनावी सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है, परन्तु दो अलग‑अलग भाषा‑सूचियों—एक मराठी में और दूसरी अंग्रेज़ी में—के कारण मतदाता दस्तावेज़ जमा करने में गड़बड़ी पैदा हो रही है। यह असंगति न केवल आम नागरिकों को उलझन में डाल रही है, बल्कि ब्लॉक लेवल अधिकारी (BLO) के कार्यभार को भी बढ़ा रही है।

भ्रम का स्रोत

महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा जारी अंग्रेज़ी सूची में राशन कार्ड और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज़ शामिल हैं, जबकि मराठी सूची में वही दस्तावेज़ नहीं दिखते। सक्रिय कार्यकर्ता सुगंध जोशी ने कहा, “मराठी सूची ही वास्तविक ईसीआई निर्देशों के अनुरूप है; अंग्रेज़ी सूची में उल्लेखित दस्तावेज़ गलत हैं और मतदाता सत्यापन में बाधा बनते हैं।”

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

डिप्टी कलेक्टर मिनाल कालासकर ने स्पष्ट किया कि “SIR सत्यापन के लिये घोषित सूची केवल संदर्भ हेतु है। अतिरिक्त दस्तावेज़ जो मतदाता की नागरिकता और आयु सिद्ध करने में मदद कर सकते हैं, उन्हें स्वीकार किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि राशन कार्ड केवल परिवारिक संबंध दिखा सकता है, परन्तु आयु प्रमाण नहीं देता, इसलिए इसे अकेले नागरिकता या आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, फोटो और पते वाले बैंक पासबुक को पहचान प्रमाण माना जा सकता है।

ईसीआई का आधिकारिक मार्गदर्शन

इंडियन एलेक्शन कमिशन (ईसीआई) के अनुसार, यदि किसी मतदाता का एन्क्यूमरेशन फॉर्म वापस नहीं आया, तो BLO “अनुपस्थित”, “स्थानांतरित”, “मृत्यु” या “डुप्लिकेट” जैसे संभावित कारणों को नोट कर सकते हैं। इन मतदाताओं की सूची संबंधित शहरी निकाय और ब्लॉक कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित की जाएगी, जिससे नागरिकों को अपनी स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

भविष्य की संभावनाएँ

जैसे-जैसे पुणे में SIR प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, स्पष्ट और एकीकृत दस्तावेज़ सूची का होना आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भाषा‑असंगति को जल्द से जल्द दूर किया जाए, ताकि मतदाता अपने अधिकारों का प्रयोग बिना किसी अनावश्यक बाधा के कर सकें। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक संगति और सार्वजनिक जागरूकता दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।