सिनियर कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस को एक ज्ञापन में उन्नत नागरिक संहिता (UCC) समिति में ईसाई‑मुस्लिम प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति की ओर इशारा किया। उन्होंने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की माँग की, ताकि विधेयक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ तैयार हो सके।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • उन्नत नागरिक संहिता (UCC) समिति में ईसाई‑मुस्लिम प्रतिनिधित्व नहीं है।
  • हुसैन दलवाई ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की माँग की।
  • राष्ट्रपति न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई प्रमुख वाली 7‑सदस्यीय समिति को छह महीने में रिपोर्ट देनी है।

10 जुलाई, 2026 को वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हुसैन दलवाई ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस को एक औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें प्रस्तावित उन्नत नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे के लिए गठित समिति की संरचना पर तीखा विरोध दर्ज किया गया। दलवाई ने विशेष रूप से कहा कि वर्तमान समिति में ईसाई और मुस्लिम समुदायों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिससे समावेशी कानून निर्माण की प्रक्रिया पर प्रश्न उठता है।

समिति की वर्तमान संरचना

फडनविस ने 9 जुलाई को सात सदस्यीय समिति की घोषणा की थी, जिसका नेतृत्व सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई करेंगे। इसमें पूर्व बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश आर.सी. चावण और एस.जी. मेहरे, पूर्व महाराष्ट्र मुख्य सचिव डी.के. जैन, पूर्व राज्य मुख्य अधिवक्ता बिरेन्द्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पाटांगे और शिक्षाविद् डॉ. सुवर्णा रावल शामिल हैं। हालांकि, इन नामों में कोई भी ईसाई या मुस्लिम प्रतिनिधि नहीं है, जिससे दलवाई ने इसे “असमावेशी” कहा।

UCC का ऐतिहासिक संदर्भ

उन्नत नागरिक संहिता भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में लिखी गई एक लक्ष्य है, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों को एक समान नागरिक संहिता में बदलना है। यह विचार डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन तब से इसे विभिन्न सामाजिक‑धार्मिक बहसों का केंद्र बिंदु बनाते हुए कई बार टाला गया है। विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यकों ने इस मुद्दे को संवेदनशील माना है, क्योंकि उनका व्यक्तिगत कानून उनके धार्मिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

राजनीतिक प्रभाव और आगामी सत्र

महाराष्ट्र में आगामी शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक को पेश करने की योजना है, जिससे राज्य स्तर पर इस मुद्दे की तीव्रता बढ़ेगी। कांग्रेस की इस आलोचना न केवल महाराष्ट्र में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एकजुटता की पुकार बन गई है, जहाँ अन्य राजनीतिक दल भी समान मांगें कर रहे हैं। दलवाई ने कहा कि “सरकारी निर्णय केवल तभी वैध हो सकता है जब वह सभी समुदायों की आवाज़ सुने और उनके सुझावों को शामिल करे”।

भविष्य की दिशा

यदि फडनविस सरकार दलवाई की मांग को स्वीकार करती है और समिति में ईसाई‑मुस्लिम प्रतिनिधियों को जोड़ती है, तो यह UCC के मसौदे को अधिक लोकतांत्रिक और संवैधानिक आधार पर स्थापित करने में मदद कर सकता है। अन्यथा, इस मुद्दे को अदालतों में ले जाने या सार्वजनिक विरोध को बढ़ने का जोखिम बना रहेगा, जिससे सामाजिक तनाव और विधायी देरी दोनों ही संभावित हैं।