केरल के कई नगर निगमों ने पुस्तकालय कर के रूप में एकत्रित करोड़ों रुपये को राज्य पुस्तकालय परिषद को नहीं भेजे। राज्य ने इस वित्तीय चूक को रोकने के लिए कानूनी कदम उठाने की योजना बनाई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केरल के कई नगर निगमों ने पुस्तकालय कर का भुगतान नहीं किया।
- कुल बकाया राशि लगभग ₹५० करोड़ है।
- राज्य पुस्तकालय परिषद अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
केरल के कई नगरपालिका निकायों ने सार्वजनिक पुस्तकालय विकास हेतु निर्धारित 5% पुस्तकालय कर (library cess) को राज्य पुस्तकालय परिषद को नहीं भेजा, जिससे परिषद को अभूतपूर्व वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी केरल के कोल्लम निवासी एवं पूर्व कोल्लम तालुका पुस्तकालय परिषद अध्यक्ष मुलावाना राजेंद्रन ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त की है।
पुस्तकालय कर का कानूनी ढांचा
केरल सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 1989 के तहत स्थानीय प्राधिकरणों को संपत्ति कर और निर्माण कर पर 5% अतिरिक्त पुस्तकालय कर लादने का कर्तव्य दिया गया है। यह कर स्थानीय स्तर पर एकत्रित किया जाता है और तीन महीने के भीतर राज्य पुस्तकालय परिषद के खाते में जमा करना अनिवार्य है। एकत्रित राशि का उपयोग पुस्तकालयों के विस्तार, पुस्तक अनुदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जाता है।
मुख्य डिफ़ॉल्टर और उनके बकाया राशि
दस्तावेज़ों के अनुसार, कोच्चि नगर निगम सबसे बड़े डिफ़ॉल्टर के रूप में उभरा, जिसने लगभग ₹२२.५६ करोड़ का भुगतान नहीं किया। 2022-23 से 2025-26 तक की वार्षिक बकाया राशि क्रमशः ₹२.७६ करोड़, ₹५.६३ करोड़, ₹७.४८ करोड़ और ₹६.६९ करोड़ रही। थिरुवनंतपुरम निगम ने 2025-26 के लिए केवल ₹५.२८ करोड़ बकाया छोड़ दिया, जबकि कोल्लम निगम ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कुल ₹३.८३ करोड़ का भुगतान नहीं किया। कोझिकोड निगम ने 2024-25 में ₹३.४६ करोड़ बकाया रखा है।
अन्य नगरपालिका निकायों में भी समस्या
राज्य पुस्तकालय परिषद के अनुसार, समस्या केवल बड़े निगमों तक सीमित नहीं है। पलक्कड़, अलप्पुझा, मूवट्टुपुज़ा और कई ज़िला पंचायतों ने भी पुस्तकालय कर का भुगतान नहीं किया। यह व्यापक चूक स्थानीय पुस्तकालयों की कार्यशैली को बाधित कर रही है, जिससे पुस्तक अनुदान और नई पुस्तकालय निर्माण में देरी हो रही है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
राज्य पुस्तकालय परिषद के सचिव वी.के. मधु ने कहा, “यदि स्थानीय निकाय निर्धारित तिथि से पहले राशि नहीं जमा करता, तो संस्थान के प्रमुखों को प्रति माह 2% जुर्माना देना अनिवार्य है। फिर भी कई प्रमुख अधिकारियों ने इस दायित्व का पालन नहीं किया है।” उन्होंने यह भी बताया कि परिषद अब प्रमुख डिफ़ॉल्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की तैयारी में है, जिससे भविष्य में ऐसी चूक को रोका जा सके।
इस कदम से न केवल बकाया राशि की वसूली होगी, बल्कि केरल के सार्वजनिक पुस्तकालय प्रणाली को पुनःस्थापित करने और नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण पुस्तकालय सेवाएं प्रदान करने में मदद मिलेगी।