तमिलनाडु में प्रस्तावित परिंदुर हवाई अड्डा अब तक आधिकारिक घोषणा के बिना ठहराया गया है। एकनापुरम गाँव के विरोधी किसानों को राहत मिली, जबकि आसपास के गाँवों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • परिंदुर हवाई अड्डा परियोजना को राज्य सरकार ने अस्थायी रूप से रोका
  • एकनापुरम में किसानों को भूमि बचाने की खुशी, अन्य गांवों में असुरक्षा
  • पर्यावरणीय और जल संसाधन जोखिमों को लेकर व्यापक विरोध जारी

तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के एकनापुरम गाँव के रहने वाले गोविंदराज जनार्दनन ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा परिंदुर हवाई अड्डा परियोजना को रोकना उनके लिए एक बड़ी राहत है। 27,400 करोड़ रुपये मूल्य की इस ग्रीनफ़ील्ड हवाई अड्डे की योजना में 5,300 एकड़ से अधिक भूमि को 13 से अधिक गाँवों से अधिग्रहित करने का प्रस्ताव था, जिसमें एकनापुरम दोनों रनवे के भीतर स्थित था।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

2022 में इस परियोजना की घोषणा के बाद, ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। किसानों को अपने कृषि भूमि, जल निकाय और बायोविविधता के नुकसान का डर था। यह विरोध तब और तेज़ हुआ जब 4 मई 2026 को तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित हुए और अभिनेता-राजनीतिज्ञ सी. जोसेफ विजय नई मुख्यमंत्री बने। विजय ने सत्ता में आने से पहले ही एकनापुरम के किसानों से मुलाकात की और उनके संघर्ष को समर्थन दिया।

सरकारी निर्णय और अनिश्चितता

राज्य ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने कहा कि सरकार परिंदुर हवाई अड्डा परियोजना को त्यागकर वैकल्पिक स्थल तलाशेगी, परंतु अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। उद्योग मंत्री एस. कीर्थना ने भी इस बात को दोहराया, जिससे कई उद्योग प्रतिनिधियों और यात्रियों में निराशा देखी गई। दूसरी ओर, एकनापुरम के किसान इस कदम को अपने गाँव और कृषि भूमि की रक्षा के रूप में देख रहे हैं।

पर्यावरणीय चिंताएँ और व्यापक प्रभाव

तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम के आंकड़े बताते हैं कि प्रस्तावित स्थल का 26.54% हिस्सा जल स्थलों से बना है। जल निकायों जैसे नेलवॉय तालाब, वैलेरी, कडापेरी और कालीएरी पर संभावित प्रभाव को लेकर पर्यावरणविद् और स्थानीय NGOs ने चेतावनी दी है। यदि इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया, तो कंबन नहर के मार्ग में बाधा और मौसमी बाढ़ की संभावना बढ़ सकती है, जो चेन्नई के मौसमी जल आपदा को और बिगाड़ सकती है।

अन्य गांवों की स्थिति

परियोजना की घोषणा के बाद, जुलाई 2025 में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई। एकनापुरम को छोड़कर, नीलवॉय, नागापट्टु, थंडालम, पोडावुर, वलथुर और अक्कामपुरम जैसे गाँवों से लगभग 1,700 एकड़ भूमि ले ली गई है। इन गाँवों के निवासी अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित हैं—क्या भूमि वापस मिलेगी, या उन्हें नई आर्थिक व्यवस्था में ढलना पड़ेगा। कई किसान अपनी आजीविका के नुकसान को लेकर सरकार से स्पष्ट उत्तर की मांग कर रहे हैं।

समग्र रूप से, परिंदुर हवाई अड्डा परियोजना ने तमिलनाडु में विकास, पर्यावरण और सामाजिक न्याय के बीच जटिल टकराव को उजागर किया है। सरकार की आगे की नीति इस मुद्दे को स्थायी समाधान की ओर ले जा सकेगी या नहीं, यह देखते ही बनता है।