विशेष जांच टीम (SIT) ने गडे साई कृष्णा की हिरासत में मौत के संदिग्ध अधिकारी को पूरी तरह से पूछताछ करने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अंड्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए, टीम ने न्यायालय से कठोर शर्तों को हटाने की भी माँग की है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • SIT ने सुप्रीम कोर्ट में गडे साई कृष्णा की हिरासत में मौत की जांच हेतु अधिक अधिकारों की मांग की।
  • अधिकारियों पर SC/ST अधिनियम और आत्महत्या के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज।
  • विस्थापित सर्कल इंस्पेक्टर नागराजु और उनके सहयोगियों को संभावित हत्या के आरोपों का सामना।

गडे साई कृष्णा की हिरासत में मृत्यु के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें वह न्यायालय से आरोपी सर्कल इंस्पेक्टर एस.एस.वी.वी. नागराजु को पूरी तरह से पूछताछ करने की अनुमति चाहती है। इस याचिका में हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित वीडियो‑रिकॉर्डिंग और सीमित पूछताछ की शर्तों को हटाने की भी माँग की गई है।

पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ

अंड्र प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले SIT को निर्देश दिया था कि वह नागराजु को व्यक्तिगत रूप से पूछे और पूरी प्रक्रिया को वीडियो‑रिकॉर्ड करे। SIT ने यह माना कि ऐसी शर्तें जांच की स्वतंत्रता को बाधित कर सकती हैं, इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट से सीधे हस्तक्षेप का अनुरोध किया। इस कदम ने राज्य‑स्तरीय न्यायिक आदेशों को चुनौती देने की सीमा को भी उजागर किया है।

संबंधित मामलों की प्रगति

इसी समय, कृष्णा पुलिस स्टेशन ने विस्थापित सर्कल इंस्पेक्टर नागराजु और उनके सहयोगियों के खिलाफ SC/ST (Prevention of Atrocities) अधिनियम, 1989 तथा बिंदु निवारण एवं स्व-सहायता (BNSS) धारा 108 के तहत एक अलग मामला दर्ज किया। यह मामला पीरुपोगु क्रांती कुमार की संदिग्ध मृत्यु से जुड़ा है, जिनके परिवार ने बताया कि उनके बेटे को पुलिस द्वारा लगातार बुलाया जाता रहा और अंततः वह आत्महत्या कर बैठा।

परिणाम और संभावित प्रभाव

यदि सुप्रीम कोर्ट SIT की याचिका को मंजूरी देता है, तो यह न केवल इस विशेष मामले में बल्कि भविष्य में पुलिस हिरासत‑मृत्यु के मामलों में जांच के दायरे को विस्तारित कर सकता है। न्यायिक प्रक्रिया में लचीलापन और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, SC/ST अधिनियम के तहत दर्ज किए गए आरोपों से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक उत्थान एवं सुरक्षा के कानूनों को लागू करने में पुलिस की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जा रहा है।

समुदाय और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद स्थानीय समुदाय में व्यापक चिंता देखी गई है। कई नागरिक और मानवाधिकार संगठनों ने पुलिस की जवाबदेही की माँग की है, साथ ही पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिलने की आशा व्यक्त की है। इस संदर्भ में, आत्महत्या के विचार रखने वाले लोगों को 100 पर मदद के लिए संपर्क करने की सलाह भी दी गई है।