उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समकालीन राजनीति को ‘अपील‑राजनीति’ कहकर आलोचना की, और कहा कि सपा व कांग्रेस ने अयोध्या के विकास एवं राम मंदिर निर्माण में बाधा डाली। उन्होंने 2003 के एक विवादित नमाज़ के मामले को पुनः उठाया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • यूपी के सीएम ने सपा‑कांग्रेस पर अपील‑राजनीति का आरोप लगाया
  • 2003 में अयोध्या के हनुमानगढ़ी के पास नमाज़ की अनुमति को विवादित माना गया
  • विपक्षी दलों को अयोध्या के विकास और राम मंदिर निर्माण में बाधक बताया गया

नई दिल्ली (10 जुलाई, 2026) – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिकापुर में 217 विकास परियोजनाओं के भव्य उद्घाटन के बाद एक सार्वजनिक सभा में सपा और कांग्रेस पर अपील‑राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों ने हनुमानगढ़ी मंदिर के पास नमाज़ की अनुमति देकर हिंदू धर्म का अपमान किया।

2003 के विवाद की पुनः चर्चा

योगी ने इस बात को उजागर किया कि 2003 में मुलायम सिंह यादव सरकार के तहत एक प्रयास किया गया था, जहाँ रामज़ान के दौरान हनुमानगढ़ी के सामने नमाज़ आयोजित करने की अनुमति देने की कोशिश की गई थी। उस समय पुलिस ने इस प्रस्ताव को रोक दिया, परन्तु योगी ने इसे ‘पाप’ कहा और जिम्मेदारी विपक्ष पर थोप दी।

अयोध्या के विकास में विपक्षी का रुख

मुख्य मंत्री ने कहा कि सपा‑कांग्रेस ने न केवल राम मंदिर निर्माण में बाधा डाली, बल्कि अयोध्या की समग्र परिवर्तनशीलता को भी नकारा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वैल्मीकी नाम से, तथा अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं, जो विपक्षी के शासनकाल में नहीं हो पाए।

राजनीतिक प्रतिपक्ष का जवाब

बाजपा सांसद तथा पूर्व पुलिस प्रमुख ब्रिज लाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 2003 में ‘अपील‑राजनीति’ के तहत रामज़ान की नमाज़ को सार्वजनिक स्थान पर आयोजित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसे रोक दिया। इस घटना को फिर से उजागर करने से योगी के आरोपों को सुदृढ़ करने का इरादा स्पष्ट हुआ।

भविष्य की दिशा

योगी ने अंत में कहा कि अयोध्या का रूपांतरण एक राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है और विरोधी दलों को इस विकास को रोकने के बजाय सहयोगी बनना चाहिए। उन्होंने सभी को राम मंदिर के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना अपनाने का आह्वान किया।