प्रयागराज के सांसद उज्जवल रामन सिंह ने राम मंदिर दान के बड़े घोटाले की जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चलाने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को सवालों के घेरे में ला दिया। उन्होंने ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने के प्रयासों को उजागर किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट‑निरीक्षण की मांग की
  • राम मंदिर दान घोटाले में उच्च स्तर के अधिकारियों को बचाया गया
  • प्रधानमंत्री की चुप्पी को सवालों के घेरे में लाया

प्रयागराज (उ.) के कांग्रेस सांसद उज्जवल रामन सिंह ने शनिवार को पटना स्थित सादाक़त आश्रम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर दान घोटाले की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जाँच को sitting Supreme Court judge की निगरानी में होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव या हस्तक्षेप को रोका जा सके।

घोटाले की पृष्ठभूमि

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (SRJTK) की स्थापना 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर हुई थी, और तब से इसे कई राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की सहयोगी माना गया। 2023‑24 में दान संग्रह के दौरान लगभग ₹1,100 करोड़ की राशि इकट्ठा की गई, परन्तु रिपोर्टों के अनुसार इन निधियों में से बड़ी हिस्सेदारी का ग़लत उपयोग हुआ है। इस संदर्भ में, ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य जैसे चम्पत राय और अनिल मिश्रा के अचानक इस्तीफे ने सवाल उठाए हैं।

संतुलित जांच की मांग

सदस्य ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट‑निरीक्षण के बिना, इस जाँच में राजनीतिक दबाव या पक्षपात की संभावना अधिक है।” उन्होंने विशेष जांच टीम (SIT) को भी “सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों” तक सीमित रखने की आलोचना की और ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा, “जो लोग राम के नाम पर दान लेकर जनता की आशा को लुटाते हैं, उन्हें न्याय की तलवार से नहीं, बल्कि न्यायालय की निगरानी से ही सजा मिलनी चाहिए।”

वित्तीय आंकड़े और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

सिंगह ने बताया कि 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह में लगभग ₹113 करोड़ खर्च हुए, जबकि 25 नवंबर 2025 को हुए ध्वजारोहण समारोह में लगभग ₹10.12 करोड़ की लागत आई। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दान के मूल उद्देश्य से हटकर बड़े खर्चे हुए हैं, जो आम जनता के विश्वास को चोट पहुंचाते हैं।

भविष्य की दिशा

उज्जवल रामन सिंह ने तुरंत एक FIR दर्ज करने और चम्पत राय, अनिल मिश्रा सहित सभी प्रमुख शंकास्पद व्यक्तियों के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि “प्रधानमंत्री को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि यह न केवल वित्तीय धोखाधड़ी है, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का अपमान भी है।” इस मांग के साथ, कांग्रेस ने आगामी सुनवाई (13 जुलाई) को राष्ट्रीय स्तर पर देखे जाने की उम्मीद जताई है।