कांग्रेस अध्यक्ष मलिकरजून खड़गे ने मध्य प्रदेश सरकार पर 1,200 करोड़ रुपये के चावल के घोटाले का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गरीब बच्चों व महिलाओं के लिये निर्धारित अनाज को सरकारी अंधाधुंध लेनदेन में लूट लिया गया है और जांच चल रही है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ₹1,200 करोड़ की चावल की घोटाला
  • बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए अनाज का हरण
  • जांच में केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों की भागीदारी

कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकरजून खड़गे ने आज के सार्वजनिक सभागार में मध्य प्रदेश सरकार पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जिसमें एक अनुमानित 1,200 करोड़ रुपये का चावल घोटाला शामिल है। खड़गे ने कहा कि यह अनाज, जो मूल रूप से कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित करने के लिये earmarked था, अब "सार्वजनिक का अधिकार" बन कर लूट लिया गया है।

पृष्ठभूमि और आरोप

खड़गे ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में कई सरकारी आदेशों के तहत अनाज की डिलीवरी की गई थी, परंतु कई स्थानों पर प्राप्तकर्ताओं को कोई चावल नहीं मिला। इस असंगति को उजागर करने के लिये एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी। खड़गे ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी भूमि घोटाले के आरोप लगे हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

जांच की स्थिति

राज्य सरकार ने कहा है कि वह इस मामले में केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति प्राधिकरण (FSSAI) और पुलिस के साथ मिलकर गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सरकारी ठेकेदारों ने अनाज को निजी भण्डारों में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ से इसे बाजार में बेचा गया या व्यक्तिगत लाभ के लिये इस्तेमाल किया गया।

राजनीतिक प्रभाव

खड़गे के इस बयान से राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता संघर्ष फिर से गरम हो गया है। यह घोटाला केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता को भी गहरा करता है, क्योंकि लक्ष्यित वर्ग—बच्चे और गर्भवती महिलाएँ—सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर ले जाकर मध्य प्रदेश सरकार की जवाबदेही को सवालों के घेरे में लाने की कोशिश कर रहा है।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में ठेकेदारों और राजनैतिक हस्तियों के बीच जुड़ाव सिद्ध हो जाता है, तो यह मामला न्यायिक कार्रवाई के साथ-साथ नीति सुधारों की मांग भी करेगा। अनाज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, डिजिटल ट्रैकिंग और सख्त निगरानी को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।