केटीआर ने तेलंगाना के सीएम रेवन्थ रेड्डी को सार्वजनिक समर्थन के लिए नई चुनाव लड़ने की चुनौती दी, साथ ही मुख्यमंत्री के आंतरिक सर्वे में बीआरएस को 78 सीटें मिलने का दावा किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केटीआर ने रेवन्थ रेड्डी को नई चुनाव लड़ने का आग्रह किया
- मुख्यमंत्री के आंतरिक सर्वे में बीआरएस को 78 विधानसभा सीटें मिलने का अनुमान
- गोदावरी जल के उपयोग और किसान कल्याण को लेकर सरकार पर तीखा आरोप
तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर तीव्रता बढ़ी है। केटीआर (केटी रामा राव) ने राज्य के मुख्यमंत्री रेवन्थ रेड्डी को सार्वजनिक समर्थन की जाँच के लिए असेंबली को बर्खास्त करके नई चुनाव लड़ने की चुनौती दी। यह कदम तब आया जब केटीआर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के अपने कैंप ने एक आंतरिक सर्वे किया, जिसमें बीआरएस को 78 सीटों का अनुमान लगाया गया।
पृष्ठभूमि और सर्वे का विवाद
इस सर्वे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन केटीआर ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। अगर यह आंकड़ा सत्य है, तो यह दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनसंतोष में गिरावट आई है, क्योंकि बीआरएस ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद से ही अपनी पकड़ मजबूत रखी है। इस प्रकार का सर्वे अक्सर चुनावी रणनीति में उपयोग किया जाता है, जिससे विपक्षी दल अपनी लोकप्रियता को बढ़ावा दे सके।
जल नीति और किसान मुद्दा
केटीआर ने विशेष रूप से गोदावरी जल के उपयोग को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कलेश्वरम् लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (KLIS) के तहत जल का उचित वितरण नहीं हो रहा, और जल को कन्नेपल्ली से उठाकर जलाशयों को भरना चाहिए, बजाय मेडिगड्डा बैरज पर निर्भर रहने के। इस पर सरकार का जवाब नहीं मिलने से किसान वर्ग में असंतोष बढ़ रहा है, जो कृषि-प्रधान तेलनगाना में एक संवेदनशील मुद्दा है।
राजनीतिक प्रभाव और आगे की दिशा
यदि रेवन्थ रेड्डी इस चुनौती को स्वीकार करते हैं, तो तेलंगाना में असेंबली भंग कर बायपोल्स या स्थानीय निकाय चुनावों का आयोजन हो सकता है। ऐसे परिदृश्य में बीआरएस को फिर से सत्ता में लौटने की संभावनाएं बढ़ेंगी, जबकि कांग्रेस को अपनी नीतियों की पुनः समीक्षा करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जल नीति और किसान कल्याण के मुद्दे पर सरकार की त्वरित कार्रवाई ही इस राजनीतिक टकराव को शांति से समाप्त कर सकती है।
निष्कर्ष
केटीआर का यह कदम तेलंगाना की राजनीति में नई उथल-पुथल लाने की संभावना रखता है। जनता की वास्तविक भावना को समझने के लिए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण और पारदर्शी जल वितरण नीति आवश्यक होगी, जो चुनावी माहौल को स्थिर कर सके।