तेलंगाना के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामराव ने कहा कि कन्नेपल्ली पंपहाउस से पानी उठाकर बिना मेडीगड्डा बैरेज को छुए सभी जलाशयों को भरना संभव है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवनथ रेड्डी के सर्वे को चुनौती देते हुए बीआरएस को 78 विधानसभा सीटें मिलने की आशा जताई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कन्नेपल्ली पंपहाउस से पानी उठाकर सभी जलाशयों को भरा जा सकता है
- मेडीगड्डा बैरेज को छुए बिना जल आपूर्ति संभव
- बीआरएस के सर्वे में 78 सीटों की संभावना बताई गई
तेलंगाना के बहरत राष्ट्र समाज (बीआरएस) कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामराव ने आज तेलंगाना भवन में पत्रकारों को बताया कि राज्य के प्रमुख जलाशयों – मिड मैनर, लोअर मैनर, मल्लन्ना सागर, कोण्डापोचम्मा सागर और बासवापुर – को अगले 100 दिनों में कन्नेपल्ली पंपहाउस की पम्पिंग क्षमता से भरना पूरी तरह संभव है। उन्होंने कहा, "मेडीगड्डा बैरेज को बायपास करने से कोई तकनीकी बाधा नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिये जल सुरक्षा का एक सुदृढ़ विकल्प है।"
पृष्ठभूमि और जल संकट
तेलंगाना पिछले कुछ वर्षों में लगातार सूखे की मार झेल रहा है। गोदावरी और कृष्णा नदियों की प्रवाह में गिरावट, साथ ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव ने जल संसाधनों को नाजुक बना दिया है। इस संदर्भ में कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने सरकार से अनुरोध किया है कि मौजूदा नदी प्रवाह का अधिकतम उपयोग किया जाए, न कि नई बैरेज निर्माण पर खर्च किया जाए। रामराव ने इन अभियानों को "भविष्य के लिए एक रणनीतिक कदम" कहा।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच जल वितरण को लेकर अक्सर टकराव होते रहे हैं। रामराव ने स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश के पत्तिसीमा प्रोजेक्ट में गोदावरी के जल को बिना किसी बाधा के उठाया जा रहा है, जबकि तेलंगाना में वही प्रक्रिया को "खतरे" कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, "किसान देख रहे हैं, और हमें उन्हें वास्तविक समाधान देना होगा, न कि राजनीतिक बयानबाजी।"
बीडीएस सर्वे और चुनावी दावें
समाचार के दौरान रामराव ने मुख्यमंत्री रेवनथ रेड्डी के आंतरिक सर्वे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वही सर्वे बीआरएस को 78 विधानसभा सीटों की संभावना दिखा रहा है, यदि चुनाव अभी आयोजित किए जाएँ। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, "यदि मुख्यमंत्री को अपने शासन पर भरोसा है, तो वह विधानसभा को भंग करके तुरंत चुनाव करवाएँ।" यह बयान आगामी चुनावी माहौल में एक नई लहर पैदा कर सकता है।
आगे की संभावनाएँ
यदि रामराव की योजना को लागू किया जाता है, तो तेलंगाना के 8‑9 जिलों में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। साथ ही, जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण से सामाजिक तनाव कम हो सकता है। लेकिन इस कदम को साकार करने के लिये राज्य एवं केंद्र दोनों स्तरों पर सहयोग आवश्यक होगा, खासकर जल अधिकारों और बुनियादी ढांचे के संदर्भ में।