शिवसेना (UBT) के सांसद संजय रौत ने कहा कि यदि देवेंद्र फडनविस दिल्ली में भूमिका संभालेंगे तो विदर्भ के नेता चंद्रशेखर बवंकुले को महाराष्ट्र के अगले मुख्य मंत्री के रूप में देखा जा सकता है। विपक्षी दलों के बीच इस संभावित बदलाव को लेकर तीखी बहस चल रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- संजय रौत ने फडनविस के दिल्ली जाने पर बवंकुले को संभावित CM बताया
- इकनाथ शिंदे के दोबारा CM बनने की संभावना को रौत ने खारिज किया
- BJP ने अभी तक इस अटकल को आधिकारिक तौर पर नहीं माना
मुंबई – महाराष्ट्र के राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय रौत और राष्ट्रीय जनता दल (स्पिल) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को इस बात पर चर्चा की कि वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनविस को भविष्य में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। रौत ने इस संभावित बदलाव के साथ ही चंद्रशेखर बवंकुले को अगले मुख्यमंत्री के रूप में सुझाया, जबकि पवार ने इकनाथ शिंदे की बढ़ती महत्त्वता को उजागर किया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक माहौल
फडनविस के दिल्ली जाने की अटकलें पिछले कुछ हफ्तों में कई बार उभरी हैं, खासकर जब शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता आदित्य ठाकरे ने इस दिशा में संकेत दिया था। इस संदर्भ में रौत ने कहा, “यदि फडनविस दिल्ली चले जाते हैं, तो बवंकुले का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जाएगा। वास्तव में मेरा मानना है कि फडनविस स्वयं बवंकुले की सिफ़ारिश करेंगे।” बवंकुले, जो विदर्भ क्षेत्र से हैं, को रौत ने “संचार‑कुशल और लोगों को साथ ले जाने वाले नेता” के रूप में प्रशंसा की।
इकनाथ शिंदे की संभावनाएँ
रौत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इकनाथ शिंदे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, “बिल्कुल नहीं”। वहीं, पवार ने शिंदे की स्थिति को अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा, “शिंदे का वजन महाराष्ट्र और दिल्ली दोनों में बढ़ रहा है, और वरिष्ठ भाजपा नेताओं का उनका समर्थन है।” इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि शिंदे के पक्ष में अभी भी मजबूत समर्थन मौजूद है, विशेषकर उनके 2022 के विद्रोह के बाद से।
BJP की प्रतिक्रिया
भाजपा ने इन अटकलों को गंभीरता से नहीं लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता गिरीश महाजन और सुधीर मुंगंतिवर ने रौत के बयान को “अंतर्गत निर्णयों को सार्वजनिक रूप से साझा करने की कोशिश” कहा। महाजन ने व्यंग्यात्मक रूप से कहा, “हमें नहीं लगता कि भाजपा नेतृत्व सभी निर्णयों को संजय रौत को बताता है।” इस प्रकार, पार्टी ने अभी तक फडनविस को दिल्ली भेजने की कोई आधिकारिक योजना नहीं बताई है।
विपक्षी मतभेद और भविष्य की संभावनाएँ
शिवसेना (UBT) के विधायक बच्छू कडू ने भी अलग राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, “फडनविस को दिल्ली में राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, जबकि महाराष्ट्र का नेतृत्व शिंदे को ही करना चाहिए। शिंदे की बगावत ने भाजपा को फिर से सत्ता में लाया, इसलिए नैतिक आधार पर राज्य का नेतृत्व शिंदे को ही होना चाहिए।” कडू ने रौत की भविष्यवाणी पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “रौत की भविष्यवाणियां अक्सर सही नहीं रहतीं, शायद उन्होंने ज्योतिषी से सलाह ली हो।”
इन विभिन्न बयानों के बीच, महाराष्ट्र की राजनीति में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। यदि फडनविस को दिल्ली भेजा जाता है, तो राज्य के भीतर गठबंधन की गतिशीलता, विकास योजनाओं का निरंतरता, और विदर्भ‑मराठी‑सिन्धी‑कोकण के बीच शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा। इस समय, सभी प्रमुख दलों को अपनी रणनीति स्पष्ट करनी होगी, क्योंकि अगले कुछ हफ़्तों में ही यह तय हो सकता है कि महाराष्ट्र का अगला मुखिया कौन बनेगा।