आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को मुंबई में दाहिने कंधे की 3.5 घंटे की शल्यक्रिया कराई गई। गंभीर रोटेटर कफ़ चोट और एवोल्शन फ्रैक्चर की पुष्टि हुई, जबकि बायीं कंधे की सर्जरी दो महीने बाद तय है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पवन कल्याण की दाहिनी कंधे की सर्जरी 3.5 घंटे में पूरी हुई
  • रोटेटर कफ़ और एवोल्शन फ्रैक्चर की गंभीर चोटें पाई गईं
  • बायीं कंधे की सर्जरी दो महीने में निर्धारित

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता-राजनीतिज्ञ पवन कल्याण को शनिवार को मुंबई के एक प्रमुख ऑर्थोपेडिक केंद्र में दाहिने कंधे की शल्यक्रिया कराई गई। यह ऑपरेशन लगभग तीन घंटे पाँच मिनट तक चला, जिसमें रोटेटर कफ़ की गंभीर चोट और एवोल्शन फ्रैक्चर दोनों को ठीक किया गया।

पृष्ठभूमि और चोट का इतिहास

कल्याण ने पहली बार 2016 में कंधे की चोट का सामना किया था, लेकिन लगातार राजनीतिक यात्राओं, जनसभाओं और भीड़ के हाथ मिलाने की आदत ने चोट को और बिगाड़ दिया। 2018 की पोरटा यात्रा, 2019 के चुनावी दौर और 2023 की विभिन्न यत्र-त्राणों में भीड़ के अत्यधिक संपर्क ने रोटेटर कफ़ को क्षतिग्रस्त किया। यह दर्द उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों के बावजूद छुपा रहा, जिससे अंततः गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई।

सर्जरी की तैयारी और प्रक्रिया

अप्रैल में नाक की सर्जरी के दौरान किए गए विस्तृत चिकित्सा परीक्षण ने रोटेटर कफ़ की गंभीर क्षति और एवोल्शन फ्रैक्चर की पहचान की। विश्व प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. दिनशा पर्डिवाला ने टीम का नेतृत्व किया। डॉक्टरों ने एक साथ दोनों कंधों की सर्जरी को टालने का फैसला किया, क्योंकि इससे पोस्ट‑ऑपरेटिव दर्द और जटिलताओं का जोखिम बढ़ता। इसलिए केवल दाहिने कंधे की ही ऑपरेशन की गई, जबकि बायीं कंधे की सर्जरी दो महीने बाद की योजना में है।

सर्जरी के बाद की स्थिति

ऑपरेशन के बाद पवन कल्याण को रिकवरी रूम में ले जाया गया, जहाँ वह एनेस्थीसिया के प्रभाव से धीरे‑धीरे बाहर आ रहे हैं। जनसेना पार्टी ने घोषणा की कि वह निकटतम निगरानी में हैं और नियमित फिजियोथेरेपी के साथ पुनर्वास जारी रहेगा। इस दौरान उन्होंने किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग नहीं लिया, जिससे उन्हें पूरी तरह से आराम मिलने की संभावना बढ़ी।

भविष्य की योजना और राजनीतिक असर

बायीं कंधे की सर्जरी के लिए दो महीने बाद का समय निर्धारित किया गया है, जिससे कल्याण को पहले से ही निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रमों को पुनः व्यवस्थित करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गंभीर चोटें सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक जारी रहने वाले नेताओं के लिए चेतावनी का संकेत देती हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति का राजनीतिक स्थिरता पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर आगामी चुनावी दौर में।