तमिलनाडु राज्य मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टीएसएमएसी) ने मद्रास हाईकोर्ट को बताया कि वह प्रत्येक शराब की बोतल के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 10 रुपये रिफंडेबल डिपॉज़िट जोड़ने की योजना बना रहा है। इस कदम से बोतल संग्रह, रीसाइक्लिंग और पर्यावरणीय सुरक्षा की जिम्मेदारी निर्माताओं को सौंपने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • टीएसएमएसी 10 रुपये डिपॉज़िट को MRP में शामिल करने की योजना बना रहा है।
  • डिपॉज़िट संग्रह व रीसाइक्लिंग की जिम्मेदारी शराब निर्माताओं को दी जाएगी।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए QR कोड ट्रैकिंग और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था प्रस्तावित।

तमिलनाडु राज्य मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टीएसएमएसी) ने 10 जुलाई, 2026 को मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश की, जिसमें बोतल बायबैक योजना के मौजूदा ढाँचे को पुनः संरचित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव के तहत प्रत्येक शराब की बोतल के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में अतिरिक्त 10 रुपये रिफंडेबल डिपॉज़िट जोड़ा जाएगा, जिसे ग्राहक बोतल लौटाने पर वापस पा सकेंगे।

कानूनी पृष्ठभूमि और प्रक्रिया

टीएसएमएसी के प्रबंध निदेशक के. नंथाकुमार ने बताया कि यह कदम केवल तब ही उठाया गया जब राज्य के अधिवक्ता जनरल विजय नारायण ने 17 जून, 2026 को एक स्पष्ट कानूनी राय दी। इसके बाद 18 जून को टीएसएमएसी ने नशीली पदार्थ एवं शराब विभाग के आयुक्त को तमिलनाडु प्रतिबंध अधिनियम, उसके नियमों और भारतीय निर्मित विदेशी स्पिरिट (IMFS) तथा बीयर निर्माताओं के लाइसेंस शर्तों में आवश्यक संशोधनों के लिए अनुरोध किया।

कर एवं राजस्व पहलू

वाणिज्य कर आयुक्त ने पहले ही राज्य सरकार को 10 रुपये अतिरिक्त सेंस के प्रस्ताव को MRP में जोड़ने के लिए प्रस्तुत किया था, साथ ही इस बदलाव के लिए कर कानूनों में आवश्यक संशोधनों की भी सिफारिश की। जबकि यह प्रस्ताव अभी सरकार की समीक्षा में है, IMFS और बीयर निर्माताओं के संघों ने सिद्धांततः बोतल संग्रह की जिम्मेदारी संभालने की स्वीकृति दे दी है, जिससे टीएसएमएसी द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया जाएगा।

पर्यावरणीय सुरक्षा और तकनीकी उपाय

अदालत ने यह आश्वासन भी प्राप्त किया कि शराब निर्माताओं को बोतलों के सुरक्षित निपटान के लिए पर्यावरणीय रूप से अनुकूल विधियों को अपनाने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसके अलावा, बोतलों की ट्रैकिंग के लिए QR कोड‑आधारित प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे हर खाली बोतल का संग्रह, पुन: उपयोग और निपटान पारदर्शी रूप से नियंत्रित हो सके। यह कदम उन घटनाओं के बाद आया है, जब जंगल में फेंकी गई बोतलों से हाथी और अन्य वन्यजीवों को गंभीर चोटें लगती थीं, और रैग पिकर्स को टूटे कांच से रक्तस्राव का सामना करना पड़ता था।

भविष्य की दिशा

यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह तमिलनाडु में शराब की बोतलों के पुनर्चक्रण को व्यवस्थित करने का एक मॉडल बन सकता है, जिससे न केवल पर्यावरणीय क्षति घटेगी बल्कि राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस पहल को सफल बनाने के लिए निर्माताओं, रिटेलर्स और उपभोक्ताओं के बीच सहयोग आवश्यक होगा, और नियामक निकायों को निरंतर निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।