विनायक राउत के ससुराल में बहु ने अपने दाम्पत्य जीवन में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अनजान गोलियों और काले जादू के प्रयोग का खुलासा किया, जिससे पाँच लोगों को बुक किया गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विनायक राउत और पांच अन्य पर उत्पीड़न का आरोप
- आध्यात्मिक अनुष्ठान, अज्ञात गोलियों और बालों की रीतियों का उल्लेख
- एक आरोपी फिज़ोज़ बाबा को पुलिस ने हिरासत में लिया
थाणे के कापुरबावड़ी पुलिस ने उभयकुंठी (UBT) नेता और पूर्व सांसद विनायक राउत, उनके पुत्र गीतेश राउत तथा पाँच अन्य व्यक्तियों को उत्पीड़न के आरोप में बुक किया है। यह कार्रवाई राउत परिवार की बहु गीरीजा राउत द्वारा दर्ज कराए गए शिकायत के बाद हुई, जिसमें उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्पीड़न का खुलासा किया।
शिकायत के मुख्य बिंदु
गीरीजा राउत ने बताया कि 2017 में गीतेश राउत से विवाह के बाद से ही उनका शारीरिक संबंध नहीं बना। 2018 से ही उन्होंने कई स्व-घोषित साधु‑संतों को बुलाकर अंत्येष्टि‑जादू जैसे अनुष्ठान करवाए, जिसका उद्देश्य उन्हें गर्भवती करना था। इन अनुष्ठानों में उनके बाल, एक जीवित मुर्गी, तार और एक विशेष पेय का उपयोग किया गया, साथ ही अज्ञात गोलियों की भी खुराक दी गई।
मानसिक उत्पीड़न का असर
गीरीजा के अनुसार, लगातार मनोवैज्ञानिक दवाब के कारण वह कई सालों तक अपने दर्द को नहीं बयां कर पाईं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका और उनके पति का जीवन एक चॉल में बीता, जबकि विनायक राउत नवरात्रि के समय ही कभी‑कभी घर आए। आर्थिक कारणों का दावा न करके, गीरीजा ने स्पष्ट किया कि यदि उनका उद्देश्य धन अर्जित करना होता तो वह पहले ही कार्रवाई कर लेते।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी पहलू
वकील सागर कदम ने राउत परिवार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र एंटी‑सुपरस्टिशन एक्ट के तहत गैर‑जमानती अपराधों का हवाला देते हुए तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने पहले ही एक आरोपी, जिसे फिरोज़ बाबा के नाम से जाना जाता है, को हिरासत में ले लिया है और आगे की जांच जारी है।
भविष्य की संभावनाएँ
यह मामला न केवल व्यक्तिगत दुरुपयोग की सीमा को चुनौती देता है, बल्कि राजनीति में शक्ति के दुरुपयोग और सामाजिक‑धार्मिक मान्यताओं के दुरुपयोग को भी उजागर करता है। यदि आगे की जांच में राउत परिवार के अन्य सदस्यों को भी दोषी पाया जाता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा झटका हो सकता है, जिससे सार्वजनिक विश्वास और पार्टी की छवि दोनों पर असर पड़ेगा।